कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव बढा़, सोखने की क्षमता हो रही कम

कार्बन उत्सर्जन का प्रभाव बढा़, सोखने की क्षमता हो रही कम

प्रकृति को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से बचाने के लिए सबसे अहम है कार्बन उत्सर्जन कम किया जाए और उसे अवशोषित और नियंत्रित करने की क्षमताओं को बढ़ाया जाए। लेकिन हाल में सामने आई दो रिसर्च इन दोनों ही बातों के विपरीत चिंता को बढ़ाने वाली हैं। पहली रिसर्च महासागर की कार्बन सोखने की क्षमता से जुड़ी है, जिसे माइक्रो प्लास्टिक प्रभावित कर रहे हैं। वहीं दूसरी रिसर्च दुनिया की उन कंपनियों से संबंधित है जो सबसे ज्यादा कार्बन का उत्सर्जन करती हैं।

प्रकाश संश्लेषण क्षमता हो रही कम

यूनिवर्सिटी ऑफ शारजाह, द एजुकेशन यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग, बीज़िंग नॉर्मल यूनिवर्सिटी और पेशावर विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इस रिसर्च में शामिल थे। शोधकर्ताओं के अनुसार महासागरों में कार्बन जमा करने की एक अहम प्रक्रिया होती है जिसे जैविक कार्बन पंप कहते हैं। समुद्र की सतह पर मौजूद फाइटोप्लैंकटन नाम के सूक्ष्म पौधे सूर्य के प्रकाश से भोजन बताने समय कार्बन डाईऑक्साइड को सोख लेते हैं। रिसर्च में पता चला है कि समुद्र में मौजूद माइक्रो प्लास्टिक फाइटोप्लैंकटन की प्रकाश संश्लेषण क्षमता को घटा रहे हैं।

कम हो रही महासागरों के कार्बन सोखने की क्षमता

प्रकाश संश्लेषण क्षमता कम होने का सीधा असर जैविक कार्बन पंप पर पड़ता है क्योंकि इस प्रक्रिया में जब यह सूक्ष्म पौधे मरते हैं तो इन्हें समुद्री जीव खा लेते हैं। इस तरह इनमें जमा कार्बन समुद्र की गहराइयों में चला जाता है, जिससे महासागरों की कार्बन सोखने की क्षमता घटने लगती है, लेकिन माइक्रो प्लास्टिक की वजह से यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। बता दें कि कार्बन डाईऑक्साइड के 30% उत्सर्जित हिस्से को महासागर सोख लेते हैं। वह ऑक्सीज़न का भी बढ़ा स्त्रोत हैं।

32 कंपनियां दुनिया के आधे कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार

दुनिया के आधे से ज़्यादा कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन के लिए सिर्फ 32 जीवाश्म ईंधन (फॉसिल फ्यूल) कंपनियाँ ज़ि म्मेदार हैं। शीर्ष प्रदूषक राज्य-नियंत्रित सऊदी अरामको ने 170 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जित किया। निजी कंपनियों में एक्सॉनमोबिल सबसे बड़ा प्रदूषक है, जिसका उत्सर्जन 61 करोड़ टन रहा। यह कितना गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर सऊदी अरामको और एक्सॉनमोबिल को सर्वाधिक कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जक देशों की सूची में रखकर देखा जाए, तो ये क्रमश: दुनिया के पांचवे और नौंवे सबसे बड़े प्रदूषक होंगे। यह खुलासा कार्बन मेजर्स डेटाबेस की ताजा रिपोर्ट में हुआ है।

कोल इंडिया दूसरी सबसे बड़ी प्रदूषक

शीर्ष 20 प्रदूषक कंपनियों में से 17 सरकारी कंपनियाँ हैं। ये कंपनियां सऊदी अरब, रूस, चीन, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और भारत की हैं। भारतीय सार्वजनिक कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड राजकीय कंपनियों की सूची में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी उत्सर्जक है। भारत में होने वाले कुल कोयला उत्पादन का 84% हिस्सा इसी से आता है। 2024 में भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक था।

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