देश सेवा से मानव सेवा तक : एक सैनिक की अमर कहानी

देश सेवा से मानव सेवा तक : एक सैनिक की अमर कहानी

चूरू. ऐसे विरले ही होते है जो मरण को केवल उत्सव नहीं बल्कि महोत्सव बना देते हैं ऐसे ही थे हनुमानगढ़ जिले की भादरा के बीएसएफ में सेवा देने वाले पूर्व सैनिक जिन्होंने अपने महाप्रयाण के बाद देह दान कर दी। ये थे भादरा के वार्ड 21 के निवासी 90 वर्षीय चंपालाल भाटी जिन्होंने अपने मृत्यु से पहले ही अपने परिजनों से कहा था उन्हें हंसते हंसते घर से विदा करना, मेरी मृत्यु के सफर को उत्सवीय माहौल देना, उनकी मृत्यु पर दुखी मत होना। उनकी इसी बात पर पौत्र अपने दादा का पार्थिव शरीर लेकर चूरू के मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे और देहदान के दादा के संकल्प को साकार किया।

दादा की अंतिम इच्छा की पूरी

चूरू की पं. दीनदयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज (Pt. Deendayal Upadhyay Medical College Churu) में मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक प्रेरणादायक दृश्य उस समय भावविह्ल कर देने वाला रहा जब पूर्व सैनिक चंपालाल भाटी की पार्थिव देह लेकर उनका पोता अभिषेक भाटी चूरू मेडिकल कॉलेज पहुंचा। उन्होंने बताया कि 8 अप्रेल को सुबह 8 बजे घर पर चंपालाल भाटी की मृत्यु हो गई। शाम 6.45 बजे देह को लेकर परिजन चूरू मेडिकल कॉलेज पहुंचे। देहदान के संकल्प को पूरा करते हुए परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया। मृत्यु उपरांत मेडिकल शिक्षा के लिए उनका शरीर मेडिकल कॉलेज को समर्पित कर दिया।

वर्ष 2023 में लिया संकल्प

एम्बुलेंस में पार्थिव देह लेकर पहुंचे भादरा के चंपालाल भाटी ने वर्ष 2023 में देहदान का संकल्प लिया था। पूर्व सैनिक भाटी मेडिकल क्षेत्र से जुड़े रहे थे। अभिषेक ने बताया कि उनके दादा ने जीवित रहते समय ही साफतौर पर कह दिया था कि उनकी मृत्यु पर शोक नहीं मनाया जाए। बल्कि इस अंतिम यात्रा को खुशी से लिया जाये।

सम्मान के साथ स्वागत

चूरू मेडिकल कॉलेज परिसर में ज्योही एम्बुलेंस से उनका पार्थिव शरीर पहुचा तो मेडिकल छात्रों ने सम्मान से सर झुकाएं। पूर्व सैनिक भाटी की पार्थिव देह का फूलों की वर्षा कर स्वागत भावुक माहौल के बीच देह को कॉलेज में प्रवेश दिया गया तो यहां उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें सजल हो उठी।

चूरू मेडिकल कॉलेज को पहला देहदान

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एमएम पुकार ने बताया कि अब तक करीब 50 लोग देहदान का संकल्प ले चुके हैं। लेकिन कॉलेज को यह पहली देह प्राप्त हुई है जो छात्रों के अध्ययन में सहायक बनेगी।

तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह

पूर्व सैनिक चंपालाल भाटी की पार्थिव देह को तिरंगे में लपेटकर लाया गया। अंतिम सम्मान के रूप में तिरंगा परिजनों को सौंपा गया। इस मौके पर अभिषेक के साथ उनके मित्र वसीम अकरम, अमन नोखवाल, मांगीलाल सुथार, उप प्राचार्य डॉ. रमाकांत वर्मा, डॉ. जितेन्द्र सोलंकी डॉ. जेपी यादव, सुरक्षा प्रहरी मनसिंह शेखाववत, वेदप्रकाश खीची, मकसूद तथा जगदीश प्रसाद आदि मौजूद रहे।

1964 में सीएल भाटी बने थे मेल नर्स

भाटी ने बताया कि उनके दादा चंपालाल भाटी ने वर्ष 1964 में महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में नर्स ग्रेड प्रथम पर कार्य किया था। इसके बाद 1969 में हनुमानगढ़ के महात्मा गांधी अस्पताल में आ गये। वर्ष 1972 में उनको श्रीगंगानगर पुलिस लाइन में भेज दिया गया था। जहां वह कैडेट्स का मेडिकल परीक्षण आदि करते थे।

आपातकाल के दौरान बीएसएफ में हुए शामिल

अभिषेकने बताया कि देश में जब आपातकाल लगा तो दादा को बीएसएफ (BSF) में नर्स प्रथम के पद पर भेज दिया गया था। उस समय सेना में बीकानेर (Bikaner), जोधपुर (Jodhpur) सहित अनेक स्थानों पर रहे थे। वर्ष 1993 में वह भादरा से सेवानिवृत हुए थे। उन्होंने बताया कि उनके दादा ने देहदान कर न केवल अपने सैन समाज बल्कि संपूर्ण भारतीय समाज को एक नई प्रेरणा दी है। परिवार में चंपालाल के 1 पुत्र, तीन पुत्रियां हैं।

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