कर्मचारी मामलों में हाई कोर्ट ने सरकार को दी नसीहत:ट्रांसफर-प्रमोशन विवाद विभाग में सुलझें, कर्मचारियों को कोर्ट न जाना पड़े

कर्मचारी मामलों में हाई कोर्ट ने सरकार को दी नसीहत:ट्रांसफर-प्रमोशन विवाद विभाग में सुलझें, कर्मचारियों को कोर्ट न जाना पड़े

सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर, प्रमोशन, इंक्रीमेंट और अन्य सेवा संबंधी मामलों को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अहम नसीहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसे मामलों में कर्मचारियों को बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाने की मजबूरी नहीं होनी चाहिए। सरकार को चाहिए कि विभागीय स्तर पर ही विवाद सुलझाने की प्रभावी और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करें। हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी विभागों में इन-हाउस डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन सिस्टम लागू किया जाए, ताकि सेवा संबंधी विवाद कोर्ट तक पहुंचने से पहले ही सुलझ सकें। आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भेजते हुए कोर्ट ने इस पर गंभीरता से अमल सुनिश्चित करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी व्यवस्था दी है कि याचिकाकर्ता 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करें, जबकि सरकार को उस पर 45 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा। उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट में फिलहाल कर्मचारियों से जुड़े 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। यह टिप्पणी जस्टिस विनय सराफ ने मंडला जिले के फॉरेस्ट गार्ड्स की वरिष्ठता और आर्थिक लाभ से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान की। छह लाख कर्मचारियों को मिल सकता है सीधा लाभ प्रदेश में लगभग- यदि कोर्ट के सुझावों पर अमल होता है, तो करीब 6 लाख अधिकारी-कर्मचारियों को सीधा फायदा मिल सकता है। इससे न केवल अदालतों में लंबित मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई भी तेज़ होगी। साथ ही सरकार और कर्मचारियों दोनों का समय और खर्च बचेगा। छोटे मामलों की भी भरमार जस्टिस सराफ ने आदेश में कहा कि इन दिनों कोर्ट में सर्विस मैटर्स की बाढ़ आ गई है। छोटे-छोटे विवाद भी अदालत तक पहुंच रहे हैं। यदि विभागों में हर स्तर पर नामित अधिकारी हों और आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों की सेवाएं ली जाएं, तो निर्णय अधिक निष्पक्ष, प्रभावी और समयबद्ध हो सकते हैं। कोर्ट का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित होगा और विवादों का समाधान सरल तरीके से संभव हो सकेगा।

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