सहरसा में विकसित भारत ग्रेजुएट फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 को लेकर जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) गौरव कुमार ने शुक्रवार शाम प्रेस को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह मिशन एक कुशल, सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मिशन के तहत चार क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा डीडीसी गौरव कुमार ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य फोकस सशक्तिकरण (एंपावरमेंट), विकास (ग्रोथ), अभिसरण (कन्वर्जेंस) और संतृप्ति (सेंचुरेशन) पर आधारित है। मिशन के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इनमें जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन व मौसम संबंधी आपदाओं से निपटने की क्षमता विकसित करना शामिल है। इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार पैदा करना और पंचायत स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। वित्तीय वर्ष में ग्रामीण मजदूरों को 125 दिनों की वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी दी जाएगी। विकसित ग्राम पंचायत प्लान के तहत स्वीकृत सभी कार्यों को विकसित भारत नेशनल और स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान से जोड़ा जाएगा। बुवाई और कटाई के चरम मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हर साल कुल 60 दिनों की अवधि के लिए अधिसूचना जारी करेगी, इस दौरान अधिनियम के अंतर्गत कार्य नहीं कराए जाएंगे। यह योजना केंद्र प्रायोजित होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी क्रमशः 60 और 40 प्रतिशत रहेगी। केंद्र सरकार वस्तुनिष्ठ मापदंडों के आधार पर राज्यवार मानक आवंटन तय करेगी, जबकि अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार को वहन करना होगा। प्राकृतिक आपदा या विशेष परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और राहत पहुंचाने के लिए विशेष शिथिलता का प्रावधान भी किया गया है। डीडीसी ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, स्पेशल टेक्नोलॉजी आधारित प्लानिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और मजबूत सोशल ऑडिट व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। मजदूरी दरें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएंगी और वही मनरेगा की दरें लागू होंगी। बिहार में वर्तमान में मजदूरी दर 255 रुपए है, जिसे आगामी छह महीनों में योजना के तहत अधिसूचित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो सरकार की ओर से बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। सहरसा में विकसित भारत ग्रेजुएट फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025 को लेकर जिला विकास आयुक्त (डीडीसी) गौरव कुमार ने शुक्रवार शाम प्रेस को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि यह मिशन एक कुशल, सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मिशन के तहत चार क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा डीडीसी गौरव कुमार ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य फोकस सशक्तिकरण (एंपावरमेंट), विकास (ग्रोथ), अभिसरण (कन्वर्जेंस) और संतृप्ति (सेंचुरेशन) पर आधारित है। मिशन के तहत चार प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा। इनमें जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और जलवायु परिवर्तन व मौसम संबंधी आपदाओं से निपटने की क्षमता विकसित करना शामिल है। इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ रोजगार पैदा करना और पंचायत स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। वित्तीय वर्ष में ग्रामीण मजदूरों को 125 दिनों की वैधानिक मजदूरी रोजगार गारंटी दी जाएगी। विकसित ग्राम पंचायत प्लान के तहत स्वीकृत सभी कार्यों को विकसित भारत नेशनल और स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान से जोड़ा जाएगा। बुवाई और कटाई के चरम मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार हर साल कुल 60 दिनों की अवधि के लिए अधिसूचना जारी करेगी, इस दौरान अधिनियम के अंतर्गत कार्य नहीं कराए जाएंगे। यह योजना केंद्र प्रायोजित होगी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी क्रमशः 60 और 40 प्रतिशत रहेगी। केंद्र सरकार वस्तुनिष्ठ मापदंडों के आधार पर राज्यवार मानक आवंटन तय करेगी, जबकि अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार को वहन करना होगा। प्राकृतिक आपदा या विशेष परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया और राहत पहुंचाने के लिए विशेष शिथिलता का प्रावधान भी किया गया है। डीडीसी ने बताया कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, स्पेशल टेक्नोलॉजी आधारित प्लानिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और मजबूत सोशल ऑडिट व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। मजदूरी दरें केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित की जाएंगी और वही मनरेगा की दरें लागू होंगी। बिहार में वर्तमान में मजदूरी दर 255 रुपए है, जिसे आगामी छह महीनों में योजना के तहत अधिसूचित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा में काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो सरकार की ओर से बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा।


