भिंड कलेक्ट्रेट पर मासूम के साथ धरने पर बैठा परिवार:जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए स्थायी डॉक्टर की मांग पर अड़ा

भिंड कलेक्ट्रेट पर मासूम के साथ धरने पर बैठा परिवार:जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए स्थायी डॉक्टर की मांग पर अड़ा

भिंड जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप होने से परेशान एक परिवार गुरुवार रात भिंड कलेक्ट्रेट परिसर में मासूम बच्ची के साथ धरने पर बैठ गया। परिवार का आरोप है कि जिला अस्पताल में लंबे समय से अल्ट्रासाउंड के लिए स्थायी चिकित्सक की तैनाती नहीं है, जिससे मरीजों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बावजूद उसे संचालित करने के लिए स्थायी चिकित्सक तैनात नहीं है। अस्थायी चिकित्सक द्वारा सेवा बंद किए जाने के बाद मरीजों के अल्ट्रासाउंड अटक गए हैं। इसी समस्या से जूझ रहे समाजसेवी वीरेंद्र वर्मा गुरुवार रात करीब 8 बजे अपनी पत्नी ऋतु और डेढ़ साल की मासूम बच्ची गुड़िया के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में ठंडी हवाओं के बीच धरने पर बैठ गए। वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी ऋतु को पेट में दर्द की शिकायत है। पिछले कई दिनों से वे जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जांच नहीं हो पा रही है। इससे बीमारी की सही जानकारी नहीं मिल पा रही और इलाज भी अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वे अब तक दो बार जिला कलेक्टर से मिल चुके हैं, लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। संतोष नगर में रहने वाले वीरेंद्र वर्मा का कहना है कि गुरुवार सुबह 10 बजे वे फिर कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी समस्या रखी, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर मजबूरन परिवार के साथ धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए स्थायी चिकित्सक की तैनाती को लेकर शासन स्तर से ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे, चाहे दिन-रात वहीं क्यों न बितानी पड़े। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भिंड में मेडिकल कॉलेज की चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन जिला अस्पताल जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा में भी स्थायी सोनोग्राफी चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पा रही है। सीनियर एडवोकेट ने दी सलाह धरने की सूचना मिलने पर भिंड शहर की सीनियर एडवोकेट सौम्या शर्मा भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने पूरे मामले को सुना और वीरेंद्र वर्मा से कहा कि रात के समय खुले में बैठने से मासूम बच्ची की तबीयत बिगड़ सकती है। उन्होंने सलाह दी कि धरने का समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित कर लें। हालांकि युवक अपनी मांग पर अड़ा रहा और वहीं बैठा रहा।

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