- खातेदारी भूमि में आवेदन के साथ ‘प्रीमियम’ वसूली पर उठाए सवाल
- ऊपरमाल पत्थरखान व्यवसायी संघ ने मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री को लिखा पत्र
राज्य सरकार ने बजट में खनन क्षेत्र के लिए घोषणाओं का पिटारा तो खोल दिया है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। वर्तमान में संचालित खनिज विभाग के कार्यालय खुद ‘संसाधनों के अभाव’ से जूझ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मौजूदा ढांचा ही चरमराया हुआ है, तो नए कार्यालय खोलने का क्या औचित्य? अवैध खनन को रोकने के लिए जिस इच्छाशक्ति और सुरक्षा बल की जरूरत है, वह नदारद है।
प्रीमियम राशि पर पेच: ‘काम से पहले दाम’ की नीति कितनी जायज
ऊपरमाल पत्थरखान व्यवसायी संघ, बिजौलियां के मंत्री रामप्रसाद विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर विभाग की विसंगतियों को उजागर किया है। खातेदारी भूमि में खान आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- तर्क: आवेदन के साथ आवेदन शुल्क लेना समझ आता है, लेकिन आवेदन के समय ही ‘प्रीमियम राशि’ जमा कराना न्यायसंगत नहीं है।
- सुझाव: विभाग को यह राशि तब लेनी चाहिए जब विभागीय पूर्तियां पूरी हो जाएं और मंशापत्र जारी हो।
- आवेदन निरस्त होने या प्रक्रिया अटकने की स्थिति में व्यवसायी की बड़ी पूंजी फंसी रहती है।
अधिकारियों की बेबसी
विभागीय सूत्रों का कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण वे चाहकर भी फील्ड मॉनिटरिंग नहीं कर पाते। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करना जान जोखिम में डालने जैसा है। ऐसे में बजट की घोषणाएं केवल कागजी शेर साबित हो सकती हैं। विजयवर्गीय का कहना है कि सरकार नए दफ्तर खोलने के बजाय मौजूदा कार्यालयों को तकनीकी और मानव संसाधन से मजबूत करे। बिना सुरक्षा और स्टाफ के अवैध खनन रोकना नामुमकिन है। साथ ही प्रीमियम राशि लेने का नियम भी संशोधित होना चाहिए।
- बड़ा सवाल: खजाना भरने वाले विभाग के पास खुद का साधन तक नहीं
- समस्या: स्टाफ की कमी
- वर्तमान स्थिति: स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे कर्मचारी भी नहीं।
- प्रभाव: अवैध खनन पर प्रभावी निगरानी संभव नहीं।
- संसाधनों का अभाव : फील्ड में जाने के लिए पर्याप्त वाहन और सुरक्षा गार्ड नहीं। इसके कारण अधिकारी फील्ड में जाने और कार्रवाई करने से कतराते हैं।
- राजस्व बनाम सुविधा : प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला विभाग खुद सुविधाओं से वंचित। इसका प्रबाव यह पड़ रहा है कि कार्यक्षमता में गिरावट आ रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।


