“सैनिक की दृढ़ इच्छाशक्ति ही सेना का साहस ‘

“सैनिक की दृढ़ इच्छाशक्ति ही सेना का साहस ‘

पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में सेना दिवस पर प्रेरक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एनसीसी की 7 गर्ल्स एवं 11 बॉयज यूनिट के कैडेट्स ने सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मेजर गजराज सिंह ने कहा कि भारतीय सेना फोर डी यानी डिसिप्लिन, डेडिकेशन, डिटरमिनेशन और डिवोशन पर कार्य करती है, जिनमें अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। अनुशासन का अर्थ स्वयं पर शासन करना है। यदि व्यक्ति अपनी इंद्रियों और कर्मों पर नियंत्रण रखता है तो वही सच्चा अनुशासन है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में “क्या करें और क्या न करें” पर स्पष्ट फोकस रखने की सलाह दी। मोबाइल उपयोग पर आगाह करते हुए कहा कि मोबाइल यह तय नहीं करता कि हमें क्या देखना है, बल्कि यह निर्णय हमें स्वयं लेना होता है। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अमर कुमार जैन ने बताया कि थल सेना दिवस 15 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा ने स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय शीर्ष कमांडर के रूप में पदभार ग्रहण किया था। डॉ. रंजना मिश्रा ने कहा कि भारतीय सेना विश्व में गौरवशाली स्थान रखती है और प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सेना के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखे। व्याख्यान के बाद प्रभारी प्राचार्य डॉ. मिश्रा, डॉ. गोपा जैन एवं लेफ्टिनेंट कीर्ति रैकवार ने मेजर गजराज सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही विगत वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 15 एनसीसी कैडेट्स सार्जेंट नन्नीबाई लोधी, सीनियर अंडर ऑफिसर सुजाता सेन, लांस कॉरपोरल देववती गौड़, केडेट आशा अहिरवार, रिया कोरी सहित अन्य को मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया।

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