कानपुर में शनिवार की शाम शहर के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। जब सूफी गायकी के बेताज बादशाह कैलाश खेर मंच पर उतरे, तो समां ऐसा बंधा कि हर कोई बस देखता रह गया। एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे कैलाश ने अपनी बुलंद आवाज और रूहानी गीतों से दर्शकों को ऐसा बांधा कि घंटों तक लोग अपनी जगह से हिल नहीं पाए। दमदार आलाप के साथ धमाकेदार एंट्री रात करीब 8:30 बजे जैसे ही मंच की लाइटें नीली और पीली रोशनी में नहाईं, कैलाश खेर ने अपनी चिर-परिचित शैली में एक लंबा और दमदार आलाप लेकर एंट्री की। उनकी आवाज की गूंज ने ही बता दिया था कि शाम यादगार होने वाली है। बिना किसी तामझाम के, उन्होंने सीधे संगीत के जरिए लोगों के दिलों में पैठ बनाई। ‘तौबा-तौबा’ पर थिरके कदम, ‘किनारे’ पर मिली शांति कैलाश ने जब अपने सुपरहिट गाने ‘तौबा तौबा रे तेरी सूरत’ की शुरुआती पंक्तियां छेड़ीं, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने ‘कैलासा’ एल्बम का बेहद भावुक गीत ‘तू ही किनारा, तू ही सहारा’ सुनाया। इस गाने के दौरान माहौल एकदम शांत हो गया और लोग अपनी आंखें बंद कर संगीत की गहराई में डूबे नजर आए। मंच पर उनके साथ मौजूद गिटार वादकों और ड्रमर ने धुन का ऐसा जाल बुना कि हर कोई मंत्रमुग्ध था। फ्लैशलाइट्स से जगमगा उठा मैदान कार्यक्रम का सबसे खूबसूरत नजारा तब दिखा जब दर्शकों ने अपने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट जला ली। अंधेरे में टिमटिमाती हजारों रोशनी के बीच कैलाश खेर जब गा रहे थे, तो ऐसा लग रहा था मानो जमीन पर सितारे उतर आए हों। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर कोई अपनी जगह पर झूम रहा था। ‘जय जयकारा’ के साथ कैलाश खेर ने बांधा समा इस दौरान जब कैलाश खेर ने फिल्म बाहुबली का प्रसिद्ध गीत ‘जय जयकारा’ शुरू किया, तो जोश का स्तर सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने माइक दर्शकों की ओर घुमाया और पूरी भीड़ एक सुर में गाने लगी। ड्रम की थाप और ‘जय जयकारा’ के नारों के साथ इस शानदार संगीत संध्या का समापन हुआ।


