बरेली। परधौली गांव के पास हुए भीषण सड़क हादसे ने एक सनसनीखेज अपहरण कांड का पर्दाफाश कर दिया। हादसे में मारे गए तीनों युवक दरअसल बदमाश निकले, जो गुरुग्राम से दो मासूम बच्चों और उनके पिता का अपहरण कर लाए थे। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चों के पिता की हत्या की साजिश रची जा रही थी, जबकि बच्चों को वापस छोड़ने की योजना थी।
रविवार दोपहर दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर शीरा से भरे टैंकर में पीछे से बोलेरो टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो सवार मनमोहन सिंह (फरीदपुर), सिकंदर (पीलीभीत) और विशेष (रामपुर) की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं चालक प्रिंस और दो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। पीछे से आ रही बाइक भी हादसे की चपेट में आ गई, जिसमें दो युवकों की जान चली गई। घायलों को अस्पताल भेजा गया। काफी देर तक बच्चों की पहचान नहीं होने पर पुलिस को शक हुआ। घायल चालक प्रिंस से पूछताछ की गई तो पूरा मामला सामने आ गया। पता चला कि दोनों बच्चे गुरुग्राम निवासी मयूर और लक्ष्य हैं, जिन्हें उनके पिता मनोज के साथ अगवा किया गया था।
पिता को बनाया बंधक, रची हत्या की साजिश
जांच में खुलासा हुआ कि बदमाशों ने मनोज को फरीदपुर स्थित मनमोहन के घर में बंधक बनाकर रखा था और उसकी हत्या की योजना बना रहे थे। इसी बीच बच्चे उनके लिए परेशानी बन गए, इसलिए उन्हें वापस गुरुग्राम छोड़ने ले जाया जा रहा था। पुलिस ने क्रॉस चेक किया तो पता चला कि गुरुग्राम के डीएलएफ थाने में चार अप्रैल को मनोज और उनके दोनों बेटों की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी। यह रिपोर्ट उनकी पत्नी पूजा ने दर्ज कराई थी।
रिश्तों के विवाद से उपजा अपराध
जांच में सामने आया कि मनमोहन और मनोज के परिवार के बीच पुराने रिश्तों का विवाद था। मनमोहन ने मनोज की नाबालिग भांजी को प्रेमजाल में फंसाकर भगाया था, जिसका मनोज विरोध कर रहा था। इसी रंजिश में अपहरण और हत्या की साजिश रची गई। पुलिस ने मनोज को सकुशल बरामद कर लिया है और आरोपी मनमोहन के पिता को हिरासत में ले लिया गया है। घायल आरोपी प्रिंस से लगातार पूछताछ जारी है। दोनों बच्चों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे इलाके में दहशत और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।


