क्विक कॉमर्स का बिजनेस मॉडल नहीं बदला:कंपनियों ने सिर्फ 10 मिनट डिलीवरी की ब्रांडिंग हटाई, बाकी सब पहले जैसा

क्विक कॉमर्स का बिजनेस मॉडल नहीं बदला:कंपनियों ने सिर्फ 10 मिनट डिलीवरी की ब्रांडिंग हटाई, बाकी सब पहले जैसा

करीब एक लाख करोड़ का क्विक कॉमर्स सेक्टर थोड़ा बदला है। केंद्र के कड़े रुख के चलते ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और फ्लिपकार्ट मिनट्स जैसे प्लेटफॉर्म्स ने ब्रांडिंग से ‘10-मिनट डिलीवरी’ का दावा हटा दिया है। हालांकि इनके बिजनेस के तरीके नहीं बदले हैं। अब कंपनियां एप पर टाइमर के बजाय दूरी (जैसे: स्टोर 500 मीटर दूर है) दिखाने पर जोर दे रही हैं। बीएसई को दी गई जानकारी में ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटर्नल ने कहा है कि ब्रांडिंग बदलने से मुनाफा प्रभावित नहीं होगा। एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि टैगलाइन से ‘10 मिनट’ हटाना बिजनेस मॉडल बदलने वाला फैसला नहीं है। कंपनियां ‘फास्ट डिलीवरी’ की ताकत नहीं छोड़ेंगी, क्योंकि यही उनकी यूएसपी है। टाइमर की जगह अब डार्क स्टोर की दूरी पर फोकस
श्रम मंत्रालय के साथ हुई बैठक और राइडर सुरक्षा की चिंताओं के बाद, ब्लिंकिट ने अपनी ब्रांडिंग से ‘10-मिनट’ के दावे को हटा दिया है। अब एप पर केवल ‘मिनटों में डिलीवरी’ जैसे शब्दों का उपयोग कर रहे हैं। लोकलसर्किल्स: 74% लोग फैसले के समर्थन में
लोकलसर्किल्स के एक सर्वेक्षण के अनुसार, अधिकांश उपभोक्ताओं ने 10-मिनट की डिलीवरी के विज्ञापनों को रोकने के सरकार के कदम का समर्थन किया है। लगभग 74% उपयोगकर्ताओं ने कहा कि अति-तेज डिलीवरी से डिलीवरी पार्टनर्स पर दबाव पड़ता है और सड़क सुरक्षा की चिंताएं बढ़ती हैं। यह सर्वे 180 जिलों के 90,000 से अधिक उपयोगकर्ताओं पर किया गया। इनमें से केवल 17% लोगों ने सरकार के इस फैसले का विरोध किया। गिग वर्कर्स ने 31 दिसंबर को हड़ताल की थी
कम कमाई और 10 मिनट में डिलीवरी के प्रेशर से परेशान गिग वर्कर्स ने न्यू ईयर से पहले 31 दिसंबर को हड़ताल की थी, जिसमें स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो जैसी कंपनियों के राइडर्स शामिल थे। इससे पहले गिग वर्कर्स ने 25 दिसंबर को क्रिसमस पर भी हड़ताल की थी। इन हड़ताल में गिग वर्कर्स ने 10 मिनट में डिलीवरी मॉडल को खत्म करने समेत कई मांगें की थीं। क्या है क्विक कॉमर्स ? गिग वर्कर्स की स्थिति

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