सरकारी स्कूल की टाट-पट्टी से आइआइटी के सफर तक, बजट भरेगा शिक्षा की ‘उम्मीदों वाली उड़ान’

सरकारी स्कूल की टाट-पट्टी से आइआइटी के सफर तक, बजट भरेगा शिक्षा की ‘उम्मीदों वाली उड़ान’

आगामी बजट शिक्षा क्षेत्र के लिए केवल आंकड़ों का खेल होगा या यह सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले आखिरी छोर के बच्चे को आइआइटी के गेट तक पहुंचाने का सेतु बनेगा। शिक्षा जगत की निगाहें अब वित्त मंत्री की पोटली पर टिकी हैं। जहां एक ओर सरकारी स्कूलों में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और शिक्षकों के खाली पद बड़ी चुनौती हैं, वहीं उच्च शिक्षा की बढ़ती फीस और कोचिंग कल्चर के बीच मध्यम वर्ग ‘सरकारी संबल’ की तलाश में है। राजस्थान पत्रिका ने बजट से पहले शिक्षकों से संवाद किया। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा के बजट को बढ़ाया जाना चाहिए। ताकि सरकारी स्कूलों का स्तर सुधरने चाहिए। साथ ही आठवां वेतन आयोग लागू हो ऐसे प्रयास सरकार को करने चाहिए। प्रदेश के हजारों स्कूलों में आज भी कमरों, लैब और खेल मैदानों का अभाव है।

आठवां वेतन आयोग एक जनवरी से हो लागू

सभी के लिए यूपीएस के स्थान पर ओपीएस पुरानी पेंशन योजना लागू हो। आठवां वेतन आयोग एक जनवरी 2026 से लागू हो। अगर लागू होने में देरी होती है, तो सरकार बकाया वेतन व एरियर का भुगतान करे यानी 2026-27 के बजट में इसका प्रावधान हो, इनकम टैक्स स्लैब में राहत मिले।

– नीरज शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील)

डिजिटल क्रांति के लिए बजट मिले

सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास तो लग गई, लेकिन उनके मेंटेनेंस और बिजली बिल के लिए अलग से बजट नहीं है। सरकार को चाहिए कि हर स्कूल के लिए ‘डिजिटल फंड’ अलॉट करे ताकि तकनीक सिर्फ शोपीस न बनी रहे।

– सुरेश कोली, शिक्षक

रिक्त पदों पर स्थाई समाधान जरूरी

शिक्षण कार्य सबसे ज्यादा शिक्षक भर्तियों के अटकने से प्रभावित होता है। बजट में पुरानी भर्तियों को पूरा करने और नई भर्तियों का कैलेंडर जारी करने का ठोस प्रावधान होना चाहिए। रिक्त पद भरे बिना गुणवत्ता संभव नहीं।

– विजय सिंह चौहान, शिक्षक

उच्च शिक्षा की फीस पर लगे लगाम

एक सरकारी स्कूल का बच्चा आइआइटी के लिए चयनित तो हो जाता है, लेकिन वहां की लाखों की फीस उसे पीछे खींच लेती है। बजट में ऐसे छात्रों के लिए विशेष ‘एजुकेशन लोन सब्सिडी’ या ‘स्कॉलरशिप बैंक’ की घोषणा होनी चाहिए।

– विनोद खोईवाल, शिक्षक

ग्रामीण स्कूलों का हो कायाकल्प

शहरों के स्कूल तो महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम के नाम पर चमक रहे, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के सामान्य स्कूलों की सुध लेने की जरूरत है। यहां बुनियादी ढाचों के लिए बजट बढ़ाया जाए। इसके अलावा ब्लॉक स्तर पर ‘एक्सीलेंस सेंटर’ खोलने चाहिए।

– वीरेंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष राजस्थान शिक्षक संघ (सियाराम)

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