पाकिस्तान में आया अब तक का सबसे बड़ा संकट, 63 प्रतिशत महंगा हुआ पेट्रोल, जनता दाने-दाने को तरसने पर मजबूर

पाकिस्तान में आया अब तक का सबसे बड़ा संकट, 63 प्रतिशत महंगा हुआ पेट्रोल, जनता दाने-दाने को तरसने पर मजबूर

पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 458.40 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला लिया गया है। इसमें 161 रुपये प्रति लीटर का पेट्रोलियम लेवी भी शामिल है। इसी तरह, पहले से ही कमजोर अर्थव्यवस्था को एक बड़ा झटका लगने का खतरा है।

‘बिजनेस रिकॉर्डर’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएमएफ प्रोग्राम की शर्तों के तहत जरूरी यह बढ़ोतरी सप्लाई चेन से होकर गुजरेगी, जिससे इनपुट लागत बढ़ेगी, मुनाफा कम होगा और आखिरकार उत्पादन में भी कमी आएगी।

किन सेक्टरों पर पड़ेगा बड़ा असर?

इस बढ़ोतरी का मकसद टैक्स के लक्ष्यों को पूरा न कर पाने के बाद सरकार के लिए रेवेन्यू जुटाना भी है, लेकिन आखिरकार इसका सीधा असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर पड़ेगा। वहीं, इसका असर ट्रांसपोर्ट पर निर्भर सेक्टरों की आर्थिक स्थिरता पर भी पड़ेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है- एक महीने के अंदर पेट्रोल की कीमतों में 63 प्रतिशत और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी कोई मामूली बदलाव नहीं है। ये पूरी व्यवस्था को प्रभावित करने वाले बदलाव हैं।

खाने-पीने की चीजें भी महंगी होंगी

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि दूसरे देशों की तुलना में पाकिस्तान में लॉजिस्टिक्स की लागत पहले से ही काफी ज्यादा है, जो इस बढ़ोतरी के बाद और भी बढ़ जाएगी, जिससे देश के घरेलू और एक्सपोर्ट बाजार की प्रतिस्पर्धात्मकता कमजोर होगी।

इस बढ़ोतरी से खाने-पीने की चीजों के उत्पादन की लागत बढ़ जाएगी, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाएंगी। हालांकि, सरकार ने इन खतरों को नजरअंदाज कर दिया है, क्योंकि वह IMF द्वारा तय की गई 152 अरब रुपये की सब्सिडी सीमा से बंधी हुई है।

क्यों तेल पर सरकार ने लगाया टैक्स?

सरकार ने ईंधन पर टैक्स लगाने का सबसे आसान तरीका अपनाया है, क्योंकि यह एक व्यापक उपाय है, जिससे बचना मुश्किल है और जिसे लागू करना भी प्रशासनिक रूप से काफी आसान है।

इस मीडिया हाउस ने सरकार के इस तर्क की आलोचना करते हुए कहा- जैसे-जैसे आर्थिक गतिविधियां धीमी होती हैं, ईंधन की खपत कम हो जाती है और इसके साथ ही, सरकार जिस रेवेन्यू को ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना चाहती है, वह भी कम हो जाता है।

अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?

रिपोर्ट में समझाया गया है कि एक निश्चित सीमा से ज्यादा टैक्स दरें होने पर रेवेन्यू की वसूली असल में कम हो जाती है। वहीं रिपोर्ट में IMF की भूमिका और उसके ‘किताबी’ आर्थिक स्थिरीकरण के तरीके की भी कड़ी आलोचना की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, अगर IMF के सुझावों को लागू किया जाता है, तो पाकिस्तान में टैक्स नियमों का पालन न करने की प्रवृत्ति और अनौपचारिक सेक्टर के दबदबे के कारण, औपचारिक अर्थव्यवस्था पर इसका बहुत ज्यादा बोझ पड़ेगा।

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