संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) के ठीक बाहर सालों से दलालों का साम्राज्य फल-फूल रहा था। स्थिति ऐसी थी कि बिना दलाल की शरण लिए आम आदमी का कोई भी काम होना लगभग नामुमकिन था। अधिकारियों की कथित मिलीभगत और आंखों पर बंधी पट्टी का फायदा उठाकर करीब 50 से अधिक दलालों ने दफ्तर के बाहर ही अपनी दुकानें सजा रखी थीं। लेकिन जैसे ही डीएम अविनाश सिंह के सख्त आदेश पर आरटीओ प्रशासन ने छापेमारी की, वहां हड़कंप मच गया। पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम लाव-लश्कर और बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंची और देखते ही देखते दलालों के अड्डों (खोखों) को मलबे में तब्दील कर दिया गया। RTO प्रशासन ने दी सफाई, कहा- आमजन को गुमराह कर रहे थे अनधिकृत व्यक्ति
कार्रवाई के बाद आरटीओ प्रशासन पंकज सिंह ने मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्रोतों से मिली सूचनाओं के आधार पर यह संज्ञान में आया था कि कार्यालय परिसर के बाहर कुछ अनधिकृत व्यक्ति आमजन को गुमराह कर रहे थे। ये लोग वाहन संबंधी कार्यों के नाम पर अवैध वसूली कर रहे थे और जनता को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे थे। इसके अलावा, अवैध अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या भी गंभीर हो गई थी। इस स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन और क्षेत्राधिकारी (नगर) के समन्वय से आज 12 मार्च, 2026 को यह विशेष संयुक्त कार्यवाही की गई। 14 सेवाएं हुई फेसलेस, विभाग ने जनता से की ऑनलाइन माध्यमों के उपयोग की अपील
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य कार्यालय के बाहर संचालित अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। दुकानों को हटाने के साथ ही वहां रखे गए संदिग्ध प्रपत्रों और सामग्री को भी जब्त किया गया है। आरटीओ प्रशासन ने जनता को जागरूक करते हुए बताया कि परिवहन विभाग की 14 सेवाएं अब पूरी तरह से “फेसलेस” यानी ऑनलाइन प्रणाली के तहत काम कर रही हैं। इन कार्यों के लिए आवेदकों को दफ्तर आने की भी जरूरत नहीं है। नागरिक घर बैठे या जन सेवा केंद्र के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने अपील की है कि किसी भी दलाल के झांसे में न आएं और यदि कोई अवैध धनराशि की मांग करे तो तत्काल विभाग को सूचित करें। सालों से दफ्तर जा रहे अधिकारियों को क्यों नहीं दिखते थे दलाल, अब डीएम की सख्ती पर खुली नींद
इस पूरी कार्रवाई ने विभागीय कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि आरटीओ और एआरटीओ समेत पूरा स्टाफ रोजाना इसी रास्ते से अपने दफ्तर जाता था, तो क्या उन्हें ये दलाल और उनकी दुकानें नजर नहीं आती थीं? आखिर इतने वर्षों तक जिम्मेदार अधिकारी कौन सा चश्मा लगाकर अपनी ड्यूटी कर रहे थे? अब जब डीएम अविनाश सिंह का चाबुक चला और हंटर की गूंज सुनाई दी, तब जाकर अधिकारियों को याद आया कि जनता से उगाही हो रही है और अतिक्रमण से रास्ता जाम है।


