मुंबई में आतंकी साजिश नाकाम, जैश-ए-मोहम्मद का ‘स्लीपर सेल’ गिरफ्तार, जांच में बड़ा खुलासा

मुंबई में आतंकी साजिश नाकाम, जैश-ए-मोहम्मद का ‘स्लीपर सेल’ गिरफ्तार, जांच में बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने मुंबई के गोवंडी इलाके से 22 वर्षीय एक इंजीनियरिंग छात्र को गिरफ्तार कर एक बड़ी आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अयान शेख (Ayan Shaikh) के रूप में हुई है, जो पिछले छह महीनों से प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के ‘स्लीपर सेल’ के रूप में शहर में सक्रिय था। अयान पर आरोप है कि वह पाकिस्तान में बैठे जैश के गुर्गों के संपर्क में था और यहां युवाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन में भर्ती करने का काम कर रहा था।

दोस्तों को बनाना चाहता था ‘आतंकी’

एटीएस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए है। अयान शेख नवी मुंबई के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ता है, उसने अपने ही करीबी दोस्तों और सहपाठियों को निशाना बनाया। वह लगातार उन पर आतंकी विचारधारा से जुड़ने का दबाव बना रहा था। जांच अधिकारियों के अनुसार, उसने अपने दो दोस्तों का इस कदर ‘ब्रेनवॉश’ कर दिया था कि वे आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए विदेश जाने तक को तैयार हो गए थे। ATS ने इन दोनों छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।

मोबाइल से मिला मसूद अजहर का वीडियो

एटीएस ने दो दिन पहले मुंबई के गोवंडी, शिवाजी नगर और कुर्ला में छापेमारी कर अयान शेख को दबोचा। तलाशी के दौरान उसके पास से कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। अयान के फोन की जांच में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर (Masood Azhar) के भड़काऊ वीडियो मिले हैं, जिन्हें वह अन्य युवाओं को भेजकर उन्हें कट्टरपंथी बनाने की कोशिश करता था।

जांच में पता चला कि अयान टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए सीमा पार बैठे अपने हैंडलर्स से जुड़ा हुआ था और कई संदिग्ध ग्रुपों का हिस्सा था।

UAPA के तहत मामला दर्ज

अयान शेख के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 38 (आतंकी संगठन की सदस्यता) और धारा 39 (आतंकी संगठन को समर्थन देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 9 मार्च तक एटीएस की हिरासत में भेज दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, अयान शेख को कथित तौर पर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों के लिए भर्ती करने की जिम्मेदारी दी गई थी। फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां अयान के वित्तीय लेन-देन की भी बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसे इस काम के लिए कहीं से फंडिंग तो नहीं मिल रही थी।

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