इजरायल-स्पेन में बढ़ा तनाव, बेंजामिन नेतन्याहू बोले- सेना के खिलाफ दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं

इजरायल-स्पेन में बढ़ा तनाव, बेंजामिन नेतन्याहू बोले- सेना के खिलाफ दुष्प्रचार बर्दाश्त नहीं

Israel-Spain row: ईरान युद्ध का असर अब दूसरे देशों के साथ रिश्तों पर भी पड़ने लगा है। अब इसको लेकर इजरायल और स्पेन के बीच कूटनीतिक तनाव एक नए चरम पर पहुंच गया है। दरअसल, लेबनान में इजरायली सैन्य हमलों की तीखी आलोचना से नाराज होकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को किरात गत स्थित ‘गाजा युद्धविराम समन्वय केंद्र’ से स्पेनिश प्रतिनिधियों को निष्कासित करने का आदेश दिया है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि इजरायल अपनी सेना के खिलाफ किसी भी प्रकार के ‘दुष्प्रचार’ और शत्रुतापूर्ण रूख को बर्दाश्त नहीं करेगे।

उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘हम पर हमला करने वालों के सामने इजराइल चुप नहीं रहेगा। स्पेन ने हमारे नायकों, IDF के सैनिकों, दुनिया की सबसे नैतिक सेना के सैनिकों को बदनाम किया है। इसलिए, स्पेन द्वारा बार-बार इजरायल के खिलाफ खड़े होने के बाद मैंने आज किरात गत स्थित समन्वय केंद्र से स्पेन के प्रतिनिधियों को हटाने का निर्देश दिया है।

बेंजामिन नेतन्याहू ने यह भी जोर देकर कहा कि जो देश ‘आतंकवादी शासन’ के बजाय इजरायल की आलोचना करते हैं, उन्हें क्षेत्र के भविष्य को आकार देने में भागीदार नहीं माना जाएगा। उन्होंने इसे ‘पाखंड’ करार देते हुए कहा कि कूटनीतिक युद्ध छेड़ने वाले देशों को इसकी तत्काल कीमत चुकानी होगी। आपको बता दें कि यह कदम तब उठाया गया है जब स्पेन ने युद्धविराम समझौते की घोषणा के बावजूद लेबनान में इजरायल की हालिया सैन्य कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है ।

स्पेन ने लेबनान में इजरायली हमले की आलोचना

स्पेन के जोस मैनुअल अल्बारेस ने लेबनान में इजरायल के हमने की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि लेबनान में स्थिति नाजुक, बेहद गंभीर और मानवता की अंतरात्मा के लिए कलंक है। हमले तुरंत बंद होने चाहिए। स्पेन देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता, लेबनानी सरकार और UNIFIL का समर्थन करता है। इस सप्ताह की शुरुआत में स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज़ ने भी [एक्स’ पर एक पोस्ट में इन हमलों की निंदा करते हुए तत्काल अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की थी।

राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज़ ने कहा था, ‘आज ही नेतन्याहू ने लेबनान पर आक्रमण शुरू होने के बाद से अपना सबसे कठोर हमला किया है। जीवन और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति उनका तिरस्कार असहनीय है। अब स्पष्ट रूप से बोलने का समय आ गया है, लेबनान को युद्धविराम में शामिल किया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अंतरराष्ट्रीय कानून के इस नए उल्लंघन की निंदा करनी चाहिए। यूरोपीय संघ को इजरायल के साथ अपने सहयोग समझौते को निलंबित करना चाहिए। इन आपराधिक कृत्यों के लिए किसी को भी छूट नहीं मिलनी चाहिए।’

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