दरभंगा में मनरेगा योजनाओं के अंतगर्त इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की अधिप्राप्ति के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) की ओर से अल्पकालीन निविदा आमंत्रित की गई है ।
सूचना के अनुसार प्रतिष्ठित, निबंधित और इच्छुक आपूर्तिकर्ताओं और एजेंसियों से द्वि-लिफाफा प्रणाली के तहत तकनीकी और वित्तीय निविदा आमंत्रित की गई है। प्राप्त निविदाओं के आधार पर जिला स्तर पर गठित समिति की अनुशंसा के बाद जिला पदाधिकारी की ओर से आपूर्तिकर्ताओं (वेंडरों) को सूचीबद्ध किया जाएगा। इच्छुक आपूर्तिकर्ता ने अपनी निविदा आज शाम 5:00 बजे तक जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय में टेंडर बॉक्स में जमा किया। निविदा में तकनीकी और वित्तीय विवरण अलग-अलग लिफाफों में सीलबंद कर एक बड़े लिफाफे में जमा करना अनिवार्य रखा गया था।
17 मार्च को सुबह 11 बजे विकास भवन में समिति के सदस्यों की उपस्थिति में टेंडर बॉक्स खोला जाएगा। तकनीकी निविदा में सफल एजेंसियों की ही वित्तीय निविदा खोली जाएगी। उप विकास आयुक्त सह अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक स्वप्निल ने बताया कि मनरेगा के तहत सामग्री आपूर्ति के लिए दर भवन निर्माण विभाग के शेड्यूल ऑफ रेट से अधिक नहीं होगी। साथ ही सामग्री की गुणवत्ता की जांच संबंधित प्रखंड के कनीय अभियंता और सहायक अभियंता की ओर से की जाएगी, जबकि कार्यपालक अभियंता मनरेगा की ओर से रैंडम आधार पर निरीक्षण किया जाएगा।
वेंडर अपलोड की प्रक्रिया हर वित्तिय वर्ष की जाती आवेदक मो. गुफरान ने बताया कि वेंडर अपलोड की प्रक्रिया हर वित्तीय वर्ष में की जाती है। पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्य जैसे बालू, गिट्टी, सीमेंट,रॉड कंस्ट्रक्शन सहित अन्य निर्माण सामग्री की आपूर्ति के लिए टेंडर करना होता है।
जो व्यक्ति टेंडर फाइल करता है और जिसे विभाग की ओर से लाइसेंस मिलता है, वही पंचायतों में निर्माण कार्यों के लिए सामग्री आपूर्ति कर सकता है। पंचायत में होने वाले भुगतान भी विभाग के माध्यम से टेंडरधारी सदस्यों के जरिए ही किया जाता है।
रिन्यूअल कराना अनिवार्य होता मो. गुफरान ने कहा कि मेरा टेंडर पहले से पास है, लेकिन हर वित्तीय वर्ष में उसका रिन्यूअल कराना अनिवार्य होता है। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, चरित्र प्रमाण पत्र और विभाग की ओर से मांगे गए अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि आज आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि है, इसलिए अपने कागजात जमा करने आए हैं। करीब एक सप्ताह पहले मुझे इसकी सूचना मिली थी, जिसके बाद टेंडर फाइल किया। अब कागजात जमा करने के बाद विभाग से सूचना मिलने का इंतजार रहेगा कि उनका आवेदन स्वीकृत हुआ है या नहीं।
विभाग से स्वीकृति के बाद आगे का काम किया जा सकेगा आवेदक उमेश कुमार ठाकुर ने बताया कि मनरेगा में वेंडर बनने और पहले से जुड़े वेंडरों के नवीनीकरण के लिए आज अंतिम तिथि थी। इसी को लेकर मैं आवेदन जमा करने पहुंचा।
मैं पहले से मनरेगा का वेंडर हूं, लेकिन हर साल इसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है। जिन वेंडरों का नाम पोर्टल पर दर्ज रहता है, वही मनरेगा योजना के तहत पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों के लिए सामग्री आपूर्ति कर सकते हैं।
आज अंतिम दिन होने के कारण सभी लोग अपने-अपने दस्तावेज जमा कर रहे हैं। आवेदन जमा करने के बाद विभाग की ओर से जांच की जाएगी और स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे कार्य किया जा सकता है। कल सुबह टेंडर खोला जाएगा
उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने बताया कि मनरेगा के तहत जो भी सामग्री का भुगतान किया जाता है, वह वेंडरों (आपूर्तिकर्ताओं) के माध्यम से ही किया जाता है। मनरेगा की गाइडलाइन के अनुसार हर वित्तीय वर्ष में वेंडरों का नवीनीकरण किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए भी इसी प्रक्रिया के तहत आवेदन मांगे गए हैं।
उन्होंने बताया कि जिले का कोई भी पात्र व्यक्ति वेंडर बनने के लिए आवेदन कर सकता है। आज आवेदन की अंतिम तिथि है, जबकि कल सुबह 11 बजे राज्य कर विभाग के पदाधिकारी और जिला लेखा पदाधिकारी की उपस्थिति में टेंडर खोला जाएगा।
टेंडर भरने के लिए क्या होना चाहिए उप विकास आयुक्त ने बताया कि टेंडर भरने के लिए आवेदकों के पास चरित्र प्रमाण पत्र, 25 हजार रुपए का बैंक ड्राफ्ट और जीएसटी रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। इसके अलावा अधिक जटिल शर्तें नहीं रखी गई हैं। जो भी व्यक्ति मनरेगा में सामग्री आपूर्तिकर्ता बनना चाहता है, वह आवेदन कर सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025–26 में जिले में कुल 271 वेंडर पंजीकृत थे, जो पूरे जिले में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों के लिए सामग्री की आपूर्ति कर सकते थे। पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों में उन्हीं वेंडरों के माध्यम से सामग्री की आपूर्ति स्वीकृत की जाती है।
कोई मजदूर काम मांगता है तो उसे कार्य देना अनिवार्य है डीडीसी ने आगे बताया कि जी-राम-जी योजना के तहत मनरेगा को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। पहले मजदूरों को 100 दिनों का रोजगार दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर अब 125 दिन करने की योजना है। यदि कोई मजदूर काम की मांग करता है तो उसे काम देना अनिवार्य है, अन्यथा उसे भत्ता देना होगा।
उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत 60 प्रतिशत कार्य जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर करने का लक्ष्य है, क्योंकि वर्तमान में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसके साथ ही इस योजना के तहत ग्रामीण हाट के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके। दरभंगा में मनरेगा योजनाओं के अंतगर्त इस्तेमाल होने वाली सामग्रियों की अधिप्राप्ति के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) की ओर से अल्पकालीन निविदा आमंत्रित की गई है ।
सूचना के अनुसार प्रतिष्ठित, निबंधित और इच्छुक आपूर्तिकर्ताओं और एजेंसियों से द्वि-लिफाफा प्रणाली के तहत तकनीकी और वित्तीय निविदा आमंत्रित की गई है। प्राप्त निविदाओं के आधार पर जिला स्तर पर गठित समिति की अनुशंसा के बाद जिला पदाधिकारी की ओर से आपूर्तिकर्ताओं (वेंडरों) को सूचीबद्ध किया जाएगा। इच्छुक आपूर्तिकर्ता ने अपनी निविदा आज शाम 5:00 बजे तक जिला ग्रामीण विकास अभिकरण कार्यालय में टेंडर बॉक्स में जमा किया। निविदा में तकनीकी और वित्तीय विवरण अलग-अलग लिफाफों में सीलबंद कर एक बड़े लिफाफे में जमा करना अनिवार्य रखा गया था।
17 मार्च को सुबह 11 बजे विकास भवन में समिति के सदस्यों की उपस्थिति में टेंडर बॉक्स खोला जाएगा। तकनीकी निविदा में सफल एजेंसियों की ही वित्तीय निविदा खोली जाएगी। उप विकास आयुक्त सह अपर जिला कार्यक्रम समन्वयक स्वप्निल ने बताया कि मनरेगा के तहत सामग्री आपूर्ति के लिए दर भवन निर्माण विभाग के शेड्यूल ऑफ रेट से अधिक नहीं होगी। साथ ही सामग्री की गुणवत्ता की जांच संबंधित प्रखंड के कनीय अभियंता और सहायक अभियंता की ओर से की जाएगी, जबकि कार्यपालक अभियंता मनरेगा की ओर से रैंडम आधार पर निरीक्षण किया जाएगा।
वेंडर अपलोड की प्रक्रिया हर वित्तिय वर्ष की जाती आवेदक मो. गुफरान ने बताया कि वेंडर अपलोड की प्रक्रिया हर वित्तीय वर्ष में की जाती है। पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्य जैसे बालू, गिट्टी, सीमेंट,रॉड कंस्ट्रक्शन सहित अन्य निर्माण सामग्री की आपूर्ति के लिए टेंडर करना होता है।
जो व्यक्ति टेंडर फाइल करता है और जिसे विभाग की ओर से लाइसेंस मिलता है, वही पंचायतों में निर्माण कार्यों के लिए सामग्री आपूर्ति कर सकता है। पंचायत में होने वाले भुगतान भी विभाग के माध्यम से टेंडरधारी सदस्यों के जरिए ही किया जाता है।
रिन्यूअल कराना अनिवार्य होता मो. गुफरान ने कहा कि मेरा टेंडर पहले से पास है, लेकिन हर वित्तीय वर्ष में उसका रिन्यूअल कराना अनिवार्य होता है। इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, चरित्र प्रमाण पत्र और विभाग की ओर से मांगे गए अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि आज आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि है, इसलिए अपने कागजात जमा करने आए हैं। करीब एक सप्ताह पहले मुझे इसकी सूचना मिली थी, जिसके बाद टेंडर फाइल किया। अब कागजात जमा करने के बाद विभाग से सूचना मिलने का इंतजार रहेगा कि उनका आवेदन स्वीकृत हुआ है या नहीं।
विभाग से स्वीकृति के बाद आगे का काम किया जा सकेगा आवेदक उमेश कुमार ठाकुर ने बताया कि मनरेगा में वेंडर बनने और पहले से जुड़े वेंडरों के नवीनीकरण के लिए आज अंतिम तिथि थी। इसी को लेकर मैं आवेदन जमा करने पहुंचा।
मैं पहले से मनरेगा का वेंडर हूं, लेकिन हर साल इसका नवीनीकरण कराना अनिवार्य होता है। जिन वेंडरों का नाम पोर्टल पर दर्ज रहता है, वही मनरेगा योजना के तहत पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों के लिए सामग्री आपूर्ति कर सकते हैं।
आज अंतिम दिन होने के कारण सभी लोग अपने-अपने दस्तावेज जमा कर रहे हैं। आवेदन जमा करने के बाद विभाग की ओर से जांच की जाएगी और स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे कार्य किया जा सकता है। कल सुबह टेंडर खोला जाएगा
उप विकास आयुक्त स्वप्निल ने बताया कि मनरेगा के तहत जो भी सामग्री का भुगतान किया जाता है, वह वेंडरों (आपूर्तिकर्ताओं) के माध्यम से ही किया जाता है। मनरेगा की गाइडलाइन के अनुसार हर वित्तीय वर्ष में वेंडरों का नवीनीकरण किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए भी इसी प्रक्रिया के तहत आवेदन मांगे गए हैं।
उन्होंने बताया कि जिले का कोई भी पात्र व्यक्ति वेंडर बनने के लिए आवेदन कर सकता है। आज आवेदन की अंतिम तिथि है, जबकि कल सुबह 11 बजे राज्य कर विभाग के पदाधिकारी और जिला लेखा पदाधिकारी की उपस्थिति में टेंडर खोला जाएगा।
टेंडर भरने के लिए क्या होना चाहिए उप विकास आयुक्त ने बताया कि टेंडर भरने के लिए आवेदकों के पास चरित्र प्रमाण पत्र, 25 हजार रुपए का बैंक ड्राफ्ट और जीएसटी रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है। इसके अलावा अधिक जटिल शर्तें नहीं रखी गई हैं। जो भी व्यक्ति मनरेगा में सामग्री आपूर्तिकर्ता बनना चाहता है, वह आवेदन कर सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025–26 में जिले में कुल 271 वेंडर पंजीकृत थे, जो पूरे जिले में मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों के लिए सामग्री की आपूर्ति कर सकते थे। पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्यों में उन्हीं वेंडरों के माध्यम से सामग्री की आपूर्ति स्वीकृत की जाती है।
कोई मजदूर काम मांगता है तो उसे कार्य देना अनिवार्य है डीडीसी ने आगे बताया कि जी-राम-जी योजना के तहत मनरेगा को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। पहले मजदूरों को 100 दिनों का रोजगार दिया जाता था, जिसे बढ़ाकर अब 125 दिन करने की योजना है। यदि कोई मजदूर काम की मांग करता है तो उसे काम देना अनिवार्य है, अन्यथा उसे भत्ता देना होगा।
उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत 60 प्रतिशत कार्य जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर करने का लक्ष्य है, क्योंकि वर्तमान में जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसके साथ ही इस योजना के तहत ग्रामीण हाट के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि महिलाओं को स्वरोजगार के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके।


