शेखपुरा में शनिवार को कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर का प्रकोप रहा। दिनभर सूर्य के दर्शन नहीं हुए, जिससे पूरे जिले का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस गिर गया। जिले का अधिकतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 21.9 डिग्री सेल्सियस था। सुबह का तापमान 8.5 डिग्री से बढ़कर 10.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। न्यूनतम और अधिकतम तापमान के बीच कम अंतर के कारण पूरा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में रहा, जिससे दिन और रात एक समान सर्दी का अनुभव हुआ। सुबह से ही वातावरण में घना कोहरा छाया रहा। घने कोहरे के साथ चलने वाली पछुआ हवाओं ने हाड़ कंपाने वाली ठंड बढ़ा दी। कोहरा इतना घना था कि दृश्यता बेहद कम हो गई थी। दोपहर बाद कोहरे का असर कुछ कम हुआ, लेकिन सूर्य के दर्शन न होने से लोगों को राहत नहीं मिली। आवश्यक कार्य से घर से बाहर निकलने वाले लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। लोग पूरी तरह गर्म कपड़ों में ढके हुए घरों से बाहर निकलने को मजबूर थे। अधिकांश लोग घरों में कंबल और रजाई में दुबके रहे, साथ ही ब्लोअर, हीटर और अंगीठी का उपयोग करते रहे। इस भीषण ठंड का सबसे अधिक असर कम आय वर्ग के लोगों पर पड़ा है। ठेला-खोमचा लगाकर जीवन यापन करने वाले और बेघर लोग इस सर्दी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भीषण ठंड से पशुओं के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिला प्रशासन के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कड़ाके की ठंड को लेकर की गई व्यवस्था को लोगों ने अपर्याप्त बताया है। शेखपुरा में शनिवार को कड़ाके की ठंड और भीषण शीतलहर का प्रकोप रहा। दिनभर सूर्य के दर्शन नहीं हुए, जिससे पूरे जिले का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान 6.4 डिग्री सेल्सियस गिर गया। जिले का अधिकतम तापमान 15.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 21.9 डिग्री सेल्सियस था। सुबह का तापमान 8.5 डिग्री से बढ़कर 10.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था। न्यूनतम और अधिकतम तापमान के बीच कम अंतर के कारण पूरा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में रहा, जिससे दिन और रात एक समान सर्दी का अनुभव हुआ। सुबह से ही वातावरण में घना कोहरा छाया रहा। घने कोहरे के साथ चलने वाली पछुआ हवाओं ने हाड़ कंपाने वाली ठंड बढ़ा दी। कोहरा इतना घना था कि दृश्यता बेहद कम हो गई थी। दोपहर बाद कोहरे का असर कुछ कम हुआ, लेकिन सूर्य के दर्शन न होने से लोगों को राहत नहीं मिली। आवश्यक कार्य से घर से बाहर निकलने वाले लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। लोग पूरी तरह गर्म कपड़ों में ढके हुए घरों से बाहर निकलने को मजबूर थे। अधिकांश लोग घरों में कंबल और रजाई में दुबके रहे, साथ ही ब्लोअर, हीटर और अंगीठी का उपयोग करते रहे। इस भीषण ठंड का सबसे अधिक असर कम आय वर्ग के लोगों पर पड़ा है। ठेला-खोमचा लगाकर जीवन यापन करने वाले और बेघर लोग इस सर्दी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भीषण ठंड से पशुओं के जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिला प्रशासन के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कड़ाके की ठंड को लेकर की गई व्यवस्था को लोगों ने अपर्याप्त बताया है।


