संख्या बल में कमजोर RJD (राष्ट्रीय जनता दल) राज्यसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी अंदरखाने हर तरह से मजबूत प्रत्याशी खोज रही है। बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने इसके लिए बकायदा कैंडिडेट से बात करना भी शुरू कर दिया है। तेजस्वी को पता है कि इस बार चुनाव में महागठबंधन की अन्य पार्टियों को एकजुट रखने के साथ-साथ ओवैसी को भी साधना है। उसकी भी रणनीति बन रही है। विधानसभा चुनाव 2025 में मिली बड़ी हार के बाद RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने तेजस्वी के लिए राज्यसभा चुनाव अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भास्कर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, RJD से कौन हो सकता है राज्यसभा का कैंडिडेट, ओवैसी को साधने का प्लान क्या है…। ऐडी सिंह को बिहार, प्रेम चंद गुप्ता को झारखंड भेजने की चर्चा RJD की संभावित लिस्ट में वर्तमान सांसद प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (AD सिंह) का नाम आगे है। गुप्ता लालू यादव के समय से पार्टी के करीबी बने हुए हैं तो AD सिंह को पिछली बार ए टू जेड फॉर्मूले के तहत राज्यसभा भेजा गया था। दोनों धन-धान और हर तरह से मजबूत हैं। सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव, प्रेमचंद गुप्ता को झारखंड से राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। गुप्ता पहले भी झारखंड से राज्यसभा जा चुके हैं। झारखंड में शिबू सोरेन के निधन के बाद 4 अगस्त 2025 से सीट खाली है। दूसरी सीट, भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। ऐसे में यदि प्रेमचंद गुप्ता या RJD झारखंड में सेटिंग कर सकें तो वहां से उनके लिए राज्यसभा जाने का दरवाजा खुल सकता है। वहीं, AD सिंह बिहार से ही RJD के कैंडिडेट हो सकते हैं। सिंह मैनेज करने में काफी समर्थ हैं। इसलिए इस एक सीट पर उनकी उम्मीदवारी की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। कौन हैं प्रेमचंद गुप्ता? प्रेमचंद गुप्ता, वर्तमान में बिहार से राज्यसभा के सदस्य हैं। वे लालू यादव के समय से राजद में जुड़े हुए हैं। वे भारत के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। इससे पहले वे झारखंड से भी राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए थे। राजनीति से पहले प्रेमचंद गुप्ता हांगकांग में NRI थे। उनके नाम पर 2 क्रिमिनल केस भी दर्ज है। उनके पास कुल 118 करोड़ रुपए की संपत्ति है। कौन हैं अमरेंद्र धारी सिंह? अमरेंद्र धारी सिंह, वर्तमान में बिहार से राज्यसभा के सदस्य हैं और भारतीय एंटरप्रेन्योर हैं। वे राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य के तौर पर कई सालों से काम कर रहे हैं। उनकी रियल एस्टेट और केमिकल सेक्टर में एक कंपनी है। उनके पास कुल 118 करोड़ रुपए की संपत्ति है। ये राजद के सीनियर नेताओं में से एक हैं। पार्टी में इनकी पकड़ मजबूत हैं और चुनावी रणनीति बनाने में माहिर हैं। 5वीं सीट पर फंसा पेंच, NDA उम्मीदवार उतारा तो बिगड़ेगा खेल बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार RJD किसी तरह से नेता प्रतिपक्ष का पद बचा पाई है। उसे 243 विधानसभा सीटों में महज 25 सीटें ही हासिल हुई है। ऐसे में RJD के लिए एक सीट जीतना इतना भी आसान नहीं है। राज्यसभा में एक उम्मीदवार की जीत के लिए नियम है कि प्रत्येक राज्य की विधानसभा की कुल सीटों और वहां खाली हुई राज्यसभा सीटों की संख्या पर निर्भर करती है। चर्चा है कि 5वीं सीट के लिए घोड़ा दौड़ेगा ही नहीं, बल्कि तेजी से दौड़ेगा। यानी पर्दे के पीछे से बड़ा खेल होगा। बिहार में कुल विधायकों की संख्या 243 है। यहां 5 सीटों पर राज्यसभा का चुनाव होना है। यानी एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों की जरूरत है। NDA को 4 सीटें जीतने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन 5वीं सीट के लिए RJD ने उम्मीदवार उतारा तो मामले में ट्विस्ट संभव है। RJD सांसद सुधाकर सिंह कहते हैं, ‘NDA का कोई मॉरल ग्राउंड 5वीं सीट के लिए नहीं है। इसलिए NDA को 5वीं सीट पर उम्मीदवार नहीं देना चाहिए। यह सिर्फ नैतिकता के आधार पर मैं नहीं कह रहा, बल्कि संख्या बल के हिसाब से भी यही होना चाहिए। अगर NDA 5वीं सीट के लिए उम्मीदवार दे देता है तो इसका मतलब साफ-साफ है कि वह हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ाएगी और इस बदौलत जीतना चाहती है।’ ओवैसी के सहारे खुल सकता है तेजस्वी का खाता तेजस्वी यादव एक सीट जीत सकते हैं, लेकिन उसके लिए पूरे महागठबंधन को एकजुट होना होगा। साथ में असदुद्दीन ओवैसी की मदद लेनी होगी। इसे ऐसे समझिए… NDA के पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। 25 विधायक राजद के हैं। इसके बाद 6 विधायक कांग्रेस के हैं। लेफ्ट के 3, आईआईपी के 1 हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। अगर सब एकजुट हुए तो एक सीट मिल सकती है। ओवैसी की पार्टी किंगमेकर है। वह जिसे समर्थन करेगी, उसकी जीत पक्की है। NDA को जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का समर्थन या विपक्ष के दूसरे दल को तोड़ना होगा। चुनाव के समय ओवैसी से बढ़ी तल्खी क्या अब दूर होगी बिहार में AIMIM ने विधानसभा चुनाव में RJD के आगे खूब हाथ पसारा। पत्र लिखा- महागठबंधन में शामिल किया जाए, लेकिन तेजस्वी तैयार नहीं हुए। अब ओवैसी की जरूरत RJD को है। चुनाव के रिजल्ट के बाद दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी कम हुई है। इस बीच ओवैसी के विधायक नीतीश कुमार से एक बार मिल हैं। हालांकि, ओवैसी की बातचीत महागठबंधन के विधायकों के साथ भी हो रही है। IIP विधायक आईपी गुप्ता का हालिया हैदराबाद दौरा इसी कड़ी का एक हिस्सा है। गुप्ता विपक्ष के सभी पार्टियों के नेताओं से समय-समय पर मिल रहे हैं। चर्चा है कि गुप्ता एक खिड़की हो सकते हैं। RJD नहीं जीती तो 2030 में राज्यसभा में 0 हो जाएगी RJD यदि 5वीं सीट नहीं जीत पाएगी तो अगले विधानसभा चुनाव यानी 2030 में उसका राज्यसभा में कोई सांसद नहीं होगा। अभी RJD के राज्यसभा में 4 सांसद हैं। प्रेम गुप्ता और ऐडी सिंह का कार्यकाल इस साल खत्म हो जाएगा। संजय यादव और मनोज झा का कार्यकाल 2030 विधानसभा चुनाव से पहले खत्म हो जाएगा। संख्या बल में कमजोर RJD (राष्ट्रीय जनता दल) राज्यसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी अंदरखाने हर तरह से मजबूत प्रत्याशी खोज रही है। बताया जा रहा है कि तेजस्वी यादव ने इसके लिए बकायदा कैंडिडेट से बात करना भी शुरू कर दिया है। तेजस्वी को पता है कि इस बार चुनाव में महागठबंधन की अन्य पार्टियों को एकजुट रखने के साथ-साथ ओवैसी को भी साधना है। उसकी भी रणनीति बन रही है। विधानसभा चुनाव 2025 में मिली बड़ी हार के बाद RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बने तेजस्वी के लिए राज्यसभा चुनाव अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। भास्कर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में पढ़िए, RJD से कौन हो सकता है राज्यसभा का कैंडिडेट, ओवैसी को साधने का प्लान क्या है…। ऐडी सिंह को बिहार, प्रेम चंद गुप्ता को झारखंड भेजने की चर्चा RJD की संभावित लिस्ट में वर्तमान सांसद प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह (AD सिंह) का नाम आगे है। गुप्ता लालू यादव के समय से पार्टी के करीबी बने हुए हैं तो AD सिंह को पिछली बार ए टू जेड फॉर्मूले के तहत राज्यसभा भेजा गया था। दोनों धन-धान और हर तरह से मजबूत हैं। सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव, प्रेमचंद गुप्ता को झारखंड से राज्यसभा भेजने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। गुप्ता पहले भी झारखंड से राज्यसभा जा चुके हैं। झारखंड में शिबू सोरेन के निधन के बाद 4 अगस्त 2025 से सीट खाली है। दूसरी सीट, भाजपा के दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है। ऐसे में यदि प्रेमचंद गुप्ता या RJD झारखंड में सेटिंग कर सकें तो वहां से उनके लिए राज्यसभा जाने का दरवाजा खुल सकता है। वहीं, AD सिंह बिहार से ही RJD के कैंडिडेट हो सकते हैं। सिंह मैनेज करने में काफी समर्थ हैं। इसलिए इस एक सीट पर उनकी उम्मीदवारी की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है। कौन हैं प्रेमचंद गुप्ता? प्रेमचंद गुप्ता, वर्तमान में बिहार से राज्यसभा के सदस्य हैं। वे लालू यादव के समय से राजद में जुड़े हुए हैं। वे भारत के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। इससे पहले वे झारखंड से भी राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए थे। राजनीति से पहले प्रेमचंद गुप्ता हांगकांग में NRI थे। उनके नाम पर 2 क्रिमिनल केस भी दर्ज है। उनके पास कुल 118 करोड़ रुपए की संपत्ति है। कौन हैं अमरेंद्र धारी सिंह? अमरेंद्र धारी सिंह, वर्तमान में बिहार से राज्यसभा के सदस्य हैं और भारतीय एंटरप्रेन्योर हैं। वे राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य के तौर पर कई सालों से काम कर रहे हैं। उनकी रियल एस्टेट और केमिकल सेक्टर में एक कंपनी है। उनके पास कुल 118 करोड़ रुपए की संपत्ति है। ये राजद के सीनियर नेताओं में से एक हैं। पार्टी में इनकी पकड़ मजबूत हैं और चुनावी रणनीति बनाने में माहिर हैं। 5वीं सीट पर फंसा पेंच, NDA उम्मीदवार उतारा तो बिगड़ेगा खेल बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार RJD किसी तरह से नेता प्रतिपक्ष का पद बचा पाई है। उसे 243 विधानसभा सीटों में महज 25 सीटें ही हासिल हुई है। ऐसे में RJD के लिए एक सीट जीतना इतना भी आसान नहीं है। राज्यसभा में एक उम्मीदवार की जीत के लिए नियम है कि प्रत्येक राज्य की विधानसभा की कुल सीटों और वहां खाली हुई राज्यसभा सीटों की संख्या पर निर्भर करती है। चर्चा है कि 5वीं सीट के लिए घोड़ा दौड़ेगा ही नहीं, बल्कि तेजी से दौड़ेगा। यानी पर्दे के पीछे से बड़ा खेल होगा। बिहार में कुल विधायकों की संख्या 243 है। यहां 5 सीटों पर राज्यसभा का चुनाव होना है। यानी एक उम्मीदवार को जीत के लिए 41 विधायकों की जरूरत है। NDA को 4 सीटें जीतने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन 5वीं सीट के लिए RJD ने उम्मीदवार उतारा तो मामले में ट्विस्ट संभव है। RJD सांसद सुधाकर सिंह कहते हैं, ‘NDA का कोई मॉरल ग्राउंड 5वीं सीट के लिए नहीं है। इसलिए NDA को 5वीं सीट पर उम्मीदवार नहीं देना चाहिए। यह सिर्फ नैतिकता के आधार पर मैं नहीं कह रहा, बल्कि संख्या बल के हिसाब से भी यही होना चाहिए। अगर NDA 5वीं सीट के लिए उम्मीदवार दे देता है तो इसका मतलब साफ-साफ है कि वह हॉर्स ट्रेडिंग को बढ़ाएगी और इस बदौलत जीतना चाहती है।’ ओवैसी के सहारे खुल सकता है तेजस्वी का खाता तेजस्वी यादव एक सीट जीत सकते हैं, लेकिन उसके लिए पूरे महागठबंधन को एकजुट होना होगा। साथ में असदुद्दीन ओवैसी की मदद लेनी होगी। इसे ऐसे समझिए… NDA के पास 202 विधायक हैं। 41 वोट के लिहाज से 4 सीटें जीत के लिए 164 विधायक लगेंगे। इसके बाद NDA के पास 38 विधायक बचेंगे और 5वीं सीट जीतने के लिए उसे 3 और विधायकों का समर्थन चाहिए। महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। 25 विधायक राजद के हैं। इसके बाद 6 विधायक कांग्रेस के हैं। लेफ्ट के 3, आईआईपी के 1 हैं। 5 विधायक असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और 1 BSP के विधायक हैं। सबको जोड़ने पर 41 विधायक होते हैं। अगर सब एकजुट हुए तो एक सीट मिल सकती है। ओवैसी की पार्टी किंगमेकर है। वह जिसे समर्थन करेगी, उसकी जीत पक्की है। NDA को जीतने के लिए ओवैसी की पार्टी का समर्थन या विपक्ष के दूसरे दल को तोड़ना होगा। चुनाव के समय ओवैसी से बढ़ी तल्खी क्या अब दूर होगी बिहार में AIMIM ने विधानसभा चुनाव में RJD के आगे खूब हाथ पसारा। पत्र लिखा- महागठबंधन में शामिल किया जाए, लेकिन तेजस्वी तैयार नहीं हुए। अब ओवैसी की जरूरत RJD को है। चुनाव के रिजल्ट के बाद दोनों पार्टियों के बीच बयानबाजी कम हुई है। इस बीच ओवैसी के विधायक नीतीश कुमार से एक बार मिल हैं। हालांकि, ओवैसी की बातचीत महागठबंधन के विधायकों के साथ भी हो रही है। IIP विधायक आईपी गुप्ता का हालिया हैदराबाद दौरा इसी कड़ी का एक हिस्सा है। गुप्ता विपक्ष के सभी पार्टियों के नेताओं से समय-समय पर मिल रहे हैं। चर्चा है कि गुप्ता एक खिड़की हो सकते हैं। RJD नहीं जीती तो 2030 में राज्यसभा में 0 हो जाएगी RJD यदि 5वीं सीट नहीं जीत पाएगी तो अगले विधानसभा चुनाव यानी 2030 में उसका राज्यसभा में कोई सांसद नहीं होगा। अभी RJD के राज्यसभा में 4 सांसद हैं। प्रेम गुप्ता और ऐडी सिंह का कार्यकाल इस साल खत्म हो जाएगा। संजय यादव और मनोज झा का कार्यकाल 2030 विधानसभा चुनाव से पहले खत्म हो जाएगा।


