25 जनवरी को RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने वाली है। बहुत संभव है कि इसमें तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया जाए। चर्चा है कि लालू राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ना चाहते हैं। पार्टी की कमान पहले ही छोटे बेटे तेजस्वी को दे चुके हैं। अब औपचारिक रूप से पूरी ताकत देना चाहते हैं। तेजस्वी के राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने से क्या बदल जाएगा? इसके क्या मायने हैं? बूझे की नाहीं में 3 पॉइंट में समझें। 1- नेतृत्व ट्रांसफर, अब तेजस्वी के हाथ में पूरी ताकत 5 जुलाई 1997 को राजद की स्थापना हुई तब से राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव हैं। वह पार्टी की सबसे बड़ी ताकत हैं। बिहार की वर्तमान राजनीति में उनके कद का नेता नीतीश कुमार को छोड़कर दूसरा नहीं है। वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। उम्र भी अधिक हो गई है। सेहत ऐसी नहीं कि राजनीतिक रूप से बहुत एक्टिव रह सकें। उन्हें पद से हटाना भी आरजेडी के लिए ठीक नहीं। ऐसे में पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए। इससे क्या होगा… तेजस्वी को पहले ही मिल चुकी है ये ताकत जनवरी 2025 में पटना में आयोजित आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संविधान में संशोधन कर लालू प्रसाद ने तेजस्वी को इंपावर किया। तय हुआ कि… 2. मामा और तेजप्रताप वाली आरजेडी तेजस्वी नहीं चाहेंगे आरजेडी टूट चुकी है! वह भी परिवार के ही बीच। तेजप्रताप कह रहे हैं कि उनकी जनशक्ति जनता दल ही लालू की असली पार्टी है। तेजप्रताप ने दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। राबड़ी देवी के तीनों भाई प्रभुनाथ, सुभाष और साधु यादव तो आए ही लालू यादव भी पहुंच गए। मैसेज यही गया कि लालू बिखरे परिवार को जोड़ना चाहते हैं। इन सभी को राजद से फिर से जोड़ा जाए तो ये अपनी-अपनी महत्वाकांक्षा के साथ पुराने फॉर्म में दिखना चाहेंगे। 3. राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा तेजस्वी का कद राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर तेजस्वी का कद बढ़ेगा। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन की पार्टियों की बैठक में उन्हें ज्यादा तवज्जो मिलेगी। तेजस्वी कागज पर भी लालू की पार्टी के कर्ताधर्ता हो जाएंगे। अन्य पार्टी के साथ बैठकों में उनका कद रहेगा। बिहार के बाहर किस राज्य में चुनाव लड़ना है। किस पार्टी के साथ गठबंधन करना है। तेजस्वी खुलकर फैसले करेंगे। असंवैधानिक को संवैधानिक दर्जा दिया जाएगाः प्रवीण बागी राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण बागी ने बताया, ‘तेजस्वी यादव अभी असंवैधानिक रूप से आरजेडी के सबसे बड़े पद पर हैं। उसे संवैधानिक स्वरूप दे दिया जाएगा। हो सकता है साल भर बाद लालू अध्यक्ष पद छोड़ दें और संरक्षक बन जाएं।’ लालू ने खुद मीसा का पत्ता साफ कर तेजस्वी को उत्तराधिकारी घोषित किया- शिवानंद तिवारी वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, ‘कार्यकारी अध्यक्ष को नियमित अध्यक्ष जितना पावर होता है। जेल जाते समय एक बार लालू ने रंजन यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। रंजन यादव की महत्वाकांक्षा जाग गई। वे विधायक दल की बैठक बुलाने और मुख्यमंत्री बनने की तैयारी करने लगे।’ उन्होंने कहा, ‘लालू ने मुझसे पूछा कि रंजन विधायक दल की बैठक बुला सकते हैं क्या? मैंने कहा- बिल्कुल बुला सकते हैं। आनन-फानन में रंजन यादव को कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटाया गया।’ शिवानंद ने कहा, ‘दिक्कत यह है कि तेजस्वी यादव की पार्टी के एक भी विधायक कम हुए यानी 25 से 24 हुए तो पोलो रोड का नेता प्रतिपक्ष का आवास उनसे छिन जा सकता है। वे अपना ऑफिस वहीं से चला रहे हैं। उनको वार रूम पार्टी कार्यालय में बनाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी के काम करने का जो तरीका है उससे 5 साल तक विपक्ष की राजनीति कर पाना काफी मुश्किल है। घर के अंदर भी काफी तनाव है।’ 25 जनवरी को RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने वाली है। बहुत संभव है कि इसमें तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया जाए। चर्चा है कि लालू राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोड़ना चाहते हैं। पार्टी की कमान पहले ही छोटे बेटे तेजस्वी को दे चुके हैं। अब औपचारिक रूप से पूरी ताकत देना चाहते हैं। तेजस्वी के राजद का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने से क्या बदल जाएगा? इसके क्या मायने हैं? बूझे की नाहीं में 3 पॉइंट में समझें। 1- नेतृत्व ट्रांसफर, अब तेजस्वी के हाथ में पूरी ताकत 5 जुलाई 1997 को राजद की स्थापना हुई तब से राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू यादव हैं। वह पार्टी की सबसे बड़ी ताकत हैं। बिहार की वर्तमान राजनीति में उनके कद का नेता नीतीश कुमार को छोड़कर दूसरा नहीं है। वह कई गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। उम्र भी अधिक हो गई है। सेहत ऐसी नहीं कि राजनीतिक रूप से बहुत एक्टिव रह सकें। उन्हें पद से हटाना भी आरजेडी के लिए ठीक नहीं। ऐसे में पार्टी के कई नेता चाहते हैं कि तेजस्वी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए। इससे क्या होगा… तेजस्वी को पहले ही मिल चुकी है ये ताकत जनवरी 2025 में पटना में आयोजित आरजेडी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के संविधान में संशोधन कर लालू प्रसाद ने तेजस्वी को इंपावर किया। तय हुआ कि… 2. मामा और तेजप्रताप वाली आरजेडी तेजस्वी नहीं चाहेंगे आरजेडी टूट चुकी है! वह भी परिवार के ही बीच। तेजप्रताप कह रहे हैं कि उनकी जनशक्ति जनता दल ही लालू की असली पार्टी है। तेजप्रताप ने दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया। राबड़ी देवी के तीनों भाई प्रभुनाथ, सुभाष और साधु यादव तो आए ही लालू यादव भी पहुंच गए। मैसेज यही गया कि लालू बिखरे परिवार को जोड़ना चाहते हैं। इन सभी को राजद से फिर से जोड़ा जाए तो ये अपनी-अपनी महत्वाकांक्षा के साथ पुराने फॉर्म में दिखना चाहेंगे। 3. राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा तेजस्वी का कद राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर तेजस्वी का कद बढ़ेगा। कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन की पार्टियों की बैठक में उन्हें ज्यादा तवज्जो मिलेगी। तेजस्वी कागज पर भी लालू की पार्टी के कर्ताधर्ता हो जाएंगे। अन्य पार्टी के साथ बैठकों में उनका कद रहेगा। बिहार के बाहर किस राज्य में चुनाव लड़ना है। किस पार्टी के साथ गठबंधन करना है। तेजस्वी खुलकर फैसले करेंगे। असंवैधानिक को संवैधानिक दर्जा दिया जाएगाः प्रवीण बागी राजनीतिक विश्लेषक प्रवीण बागी ने बताया, ‘तेजस्वी यादव अभी असंवैधानिक रूप से आरजेडी के सबसे बड़े पद पर हैं। उसे संवैधानिक स्वरूप दे दिया जाएगा। हो सकता है साल भर बाद लालू अध्यक्ष पद छोड़ दें और संरक्षक बन जाएं।’ लालू ने खुद मीसा का पत्ता साफ कर तेजस्वी को उत्तराधिकारी घोषित किया- शिवानंद तिवारी वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, ‘कार्यकारी अध्यक्ष को नियमित अध्यक्ष जितना पावर होता है। जेल जाते समय एक बार लालू ने रंजन यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। रंजन यादव की महत्वाकांक्षा जाग गई। वे विधायक दल की बैठक बुलाने और मुख्यमंत्री बनने की तैयारी करने लगे।’ उन्होंने कहा, ‘लालू ने मुझसे पूछा कि रंजन विधायक दल की बैठक बुला सकते हैं क्या? मैंने कहा- बिल्कुल बुला सकते हैं। आनन-फानन में रंजन यादव को कार्यकारी अध्यक्ष पद से हटाया गया।’ शिवानंद ने कहा, ‘दिक्कत यह है कि तेजस्वी यादव की पार्टी के एक भी विधायक कम हुए यानी 25 से 24 हुए तो पोलो रोड का नेता प्रतिपक्ष का आवास उनसे छिन जा सकता है। वे अपना ऑफिस वहीं से चला रहे हैं। उनको वार रूम पार्टी कार्यालय में बनाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘तेजस्वी के काम करने का जो तरीका है उससे 5 साल तक विपक्ष की राजनीति कर पाना काफी मुश्किल है। घर के अंदर भी काफी तनाव है।’


