औरंगाबाद आश्रय गृह में किशोर की मौत:लंबे समय से गंभीर बीमारी से था पीड़ित, सांस लेने में परेशानी हो रही थी

औरंगाबाद आश्रय गृह में किशोर की मौत:लंबे समय से गंभीर बीमारी से था पीड़ित, सांस लेने में परेशानी हो रही थी

औरंगाबाद बाल संरक्षण इकाई से रविवार को बेहद मार्मिक खबर सामने आई है। बभंडीह स्थित वृहत बाल आश्रय गृह में रह रहे 11 वर्षीय एक मासूम बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम लंबे समय से गंभीर बीमारी सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित था। शारीरिक और मानसिक विकास में विलंब से पीड़ित था। बीमारी की गंभीरता के कारण वह सामान्य बच्चों की तरह चलने-फिरने या बोलने में सक्षम नहीं था। उसे केवल तरल और मैश किया हुआ भोजन ही दिया जाता था। उसकी देखभाल विशेष सतर्कता के साथ की जाती थी और महीने में दो बार उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए उसे हायर सेंटर ले जाया जाता था, जहां न्यूरो फिजिशियन की ओर से उसका नियमित इलाज चल रहा था। 6 साल पहले गयाजी में फल्गु नदी किनारे मिला था बाल संरक्षण इकाई के डॉक्टर सन्नी सिंह ने बताया कि करीब 6 साल पहले मासूम गया जिले में फल्गु नदी किनारे अज्ञात अवस्था में पड़ा हुआ मिला था। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना तत्काल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को दी थी। सूचना मिलने के बाद सीडब्ल्यूसी की पहल पर बच्चे को गया के बाल आश्रय गृह में आवासित कराया गया। उस समय उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी और वह पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। करीब साढ़े 5 साल तक बच्चा गया के बाल संरक्षण गृह में ही रहा, जहां उसकी चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्था की जाती रही। इसके बाद जब औरंगाबाद जिले के बभंडीह में वृहत बाल आश्रय गृह का शुभारंभ हुआ, तब उसे गया से स्थानांतरित कर औरंगाबाद लाया गया। औरंगाबाद का यह आश्रय गृह करीब 6 महीने पहले ही शुरू हुआ है और तभी से यह मासूम यहीं रह रहा था। रविवार को आश्रय गृह में नियमित साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। आश्रय कर्मियों के अनुसार, वह खाना-पीना नहीं खा रहा था। तत्काल डॉक्टर सन्नी को फोन कर सूचना दी गई। डॉक्टर की सलाह पर बच्चे को आनन-फानन में सदर अस्पताल के पेडियाट्रिक वार्ड में ले जाया गया। वहां चिकित्सकों की ओर से जब उसकी जांच की गई, तो उसे मृत घोषित कर दिया गया। कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही मासूम की मौत की खबर मिलते ही आश्रय गृह के कर्मियों और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों में शोक की लहर दौड़ गई। आश्रय गृह के अधिकारी महेशानंद ऋषि का कहना है कि बच्चे को हर संभव चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी और उसकी बीमारी जन्मजात और अत्यंत जटिल थी। बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारियों ने बताया कि बच्चे की मौत की सूचना संबंधित विभाग और सीडब्ल्यूसी को दे दी गई है। आगे की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही है। औरंगाबाद बाल संरक्षण इकाई से रविवार को बेहद मार्मिक खबर सामने आई है। बभंडीह स्थित वृहत बाल आश्रय गृह में रह रहे 11 वर्षीय एक मासूम बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। मासूम लंबे समय से गंभीर बीमारी सेरेब्रल पाल्सी से ग्रसित था। शारीरिक और मानसिक विकास में विलंब से पीड़ित था। बीमारी की गंभीरता के कारण वह सामान्य बच्चों की तरह चलने-फिरने या बोलने में सक्षम नहीं था। उसे केवल तरल और मैश किया हुआ भोजन ही दिया जाता था। उसकी देखभाल विशेष सतर्कता के साथ की जाती थी और महीने में दो बार उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए उसे हायर सेंटर ले जाया जाता था, जहां न्यूरो फिजिशियन की ओर से उसका नियमित इलाज चल रहा था। 6 साल पहले गयाजी में फल्गु नदी किनारे मिला था बाल संरक्षण इकाई के डॉक्टर सन्नी सिंह ने बताया कि करीब 6 साल पहले मासूम गया जिले में फल्गु नदी किनारे अज्ञात अवस्था में पड़ा हुआ मिला था। स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना तत्काल चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को दी थी। सूचना मिलने के बाद सीडब्ल्यूसी की पहल पर बच्चे को गया के बाल आश्रय गृह में आवासित कराया गया। उस समय उसकी स्थिति अत्यंत नाजुक थी और वह पहले से ही गंभीर बीमारी से जूझ रहा था। करीब साढ़े 5 साल तक बच्चा गया के बाल संरक्षण गृह में ही रहा, जहां उसकी चिकित्सा और देखभाल की व्यवस्था की जाती रही। इसके बाद जब औरंगाबाद जिले के बभंडीह में वृहत बाल आश्रय गृह का शुभारंभ हुआ, तब उसे गया से स्थानांतरित कर औरंगाबाद लाया गया। औरंगाबाद का यह आश्रय गृह करीब 6 महीने पहले ही शुरू हुआ है और तभी से यह मासूम यहीं रह रहा था। रविवार को आश्रय गृह में नियमित साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। आश्रय कर्मियों के अनुसार, वह खाना-पीना नहीं खा रहा था। तत्काल डॉक्टर सन्नी को फोन कर सूचना दी गई। डॉक्टर की सलाह पर बच्चे को आनन-फानन में सदर अस्पताल के पेडियाट्रिक वार्ड में ले जाया गया। वहां चिकित्सकों की ओर से जब उसकी जांच की गई, तो उसे मृत घोषित कर दिया गया। कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही मासूम की मौत की खबर मिलते ही आश्रय गृह के कर्मियों और बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों में शोक की लहर दौड़ गई। आश्रय गृह के अधिकारी महेशानंद ऋषि का कहना है कि बच्चे को हर संभव चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी और उसकी बीमारी जन्मजात और अत्यंत जटिल थी। बाल संरक्षण इकाई के पदाधिकारियों ने बताया कि बच्चे की मौत की सूचना संबंधित विभाग और सीडब्ल्यूसी को दे दी गई है। आगे की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की जा रही है।  

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