विश्व अभियंत्रण दिवस के अवसर पर द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), उत्तर प्रदेश राज्य केंद्र, लखनऊ ने ‘सतत विकास हेतु स्मार्ट इंजीनियरिंग’ विषय पर एक तकनीकी व्याख्यान आयोजित किया। यह कार्यक्रम शनिवार को रिवर बैंक कॉलोनी स्थित संस्थान के भवन में संपन्न हुआ। इसमें बड़ी संख्या में इंजीनियरों, शिक्षाविदों और विद्यार्थियों ने भाग लिया, जिन्होंने आधुनिक इंजीनियरिंग और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर एवं डीन डॉ. प्रवीण कुमार शुक्ला थे। उन्होंने अपने व्याख्यान में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. शुक्ला ने विशेष रूप से एसडीजी-9 (उद्योग, नवाचार और अवसंरचना) के महत्व को समझाया। सतत औद्योगीकरण को आगे बढ़ाना है उन्होंने बताया कि एसडीजी-9 का उद्देश्य मजबूत और टिकाऊ अवसंरचना का निर्माण करना, नवाचार को बढ़ावा देना तथा समावेशी और सतत औद्योगीकरण को आगे बढ़ाना है। डॉ. शुक्ला ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में स्मार्ट इंजीनियरिंग और नई तकनीकों के माध्यम से समाज के सामने मौजूद कई चुनौतियों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण, हरित प्रौद्योगिकी, स्मार्ट सिटी का विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी नवाचार जैसे क्षेत्रों में इंजीनियरों की महत्वपूर्ण भूमिका बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक इंजीनियरिंग से न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और समाज के सभी वर्गों के लिए संतुलित विकास भी सुनिश्चित करती है। अभियंता समाज नवाचार की दिशा में अहम कार्यक्रम की अध्यक्षता इं. वी.पी. सिंह ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अभियंता समाज के विकास और नवाचार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने तकनीकी ज्ञान और नवाचार के माध्यम से ही एक बेहतर और सतत भविष्य के निर्माण को संभव बताया। कार्यक्रम के संयोजक इं. महेश गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। संस्था के मानद सचिव इं. एन. के. निषाद ने कार्यक्रम का संचालन किया और उपस्थित सभी अभियंताओं, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।


