इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य आपदा कोष से अनुग्रह राशि के भुगतान में तकनीकी आधार बाधक नहीं हो सकते हैं। न्यायमूर्ति अजित कुमार तथा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इस टिप्पणी के साथ किशोरी लाल की याचिका स्वीकार करते हुए जालौन के जिलाधिकारी को निर्देश दिया है कि वह छह सप्ताह के भीतर अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए आदेश पारित करेंगे। सांप काटने से हुई थी मौत मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि याची की पत्नी राजकुमारी की 23 अगस्त 2019 को खेत में काम करते समय सर्पदंश से मृत्यु हो गई। पुलिस ने 24 अगस्त को रोजनामचे में यह बात दर्ज की। उसी दिन जांच रिपोर्ट तैयार की गई और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसमें सर्पदंश की पुष्टि हुई। पोस्टमार्टम 24 अगस्त को किया गया था, हालांकि इसमें मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। मृतका का (विसरा) सुरक्षित रखकर जांच के लिए सौंप दिया गया।
कुछ समय बाद किशोरी लाल ने सरकार की योजना के तहत अनुग्रह राशि मुआवजा का दावा किया। स्थल निरीक्षण उपरांत लेखपाल ने प्रत्यक्षदर्शियों से बात की और 23 मार्च 2022 को रिपोर्ट में उल्लेख किया कि याची की पत्नी की मृत्यु खेत में काम करते समय सर्प दंश से हुई। इस रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम कोंच ने 30 मार्च 2022 को एडीएम को पत्र लिखा।
हालांकि उन्होंने यह बात भी लिखी कि प्रकरण सरकारी नोटिफिकेशनों के तहत नहीं आता। अस्वीकृति का कारण यह बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कोई कारण नहीं बताया गया, जबकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मृत्यु का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है।
कोर्ट ने कहा दावा उचित और सुसंगत
कोर्ट ने पाया कि सरकार ने दो अगस्त 2018 की अधिसूचना में सर्पदंश से मृत्यु को भी ऐसी परिस्थिति के रूप में मान्यता दी है, जिसमें मृतक आश्रित मुआवजे के पात्र हैं। इसी क्रम में आठ जुलाई 2021 की अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया कि यदि विसरा रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है तो यह दावे को अस्वीकृत करने का आधार नहीं होगा। कोर्ट ने कहा, याची ने पुलिस को पत्नी की मृत्यु की सूचना दी थी और गवाहों के बयान इस बात की पुष्टि करते हैं कि मृत्यु सांप के काटने से हुई थी। इस प्रकार दावा उचित और सुसंगत है। तकनीकी आधार पर दावा निरस्त नहीं किया जा सकता।


