गोरखपुर में बुधवार को प्राथमिक शिक्षकों ने BSA कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर आक्रोश जताया। जिसमे बड़ी संख्या में शिक्षक एकत्र हुए और सरकार के रुख के खिलाफ नारेबाजी की। शिक्षकों का कहना है कि सांसद लाल जी वर्मा द्वारा संसद में उठाए गए प्रश्न के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने जो उत्तर दिया, उससे 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। इसी कारण शिक्षकों को सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना पड़ा। जानें क्यों किया गया विरोध
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे ने कहा कि 2011 से पहले जब शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उस समय TET परीक्षा का कोई प्रावधान नहीं था। विभागीय नियमों के अनुसार पूरी चयन प्रक्रिया अपनाकर नियुक्तियां की गई थीं। अब 34–35 साल बाद उन्हीं शिक्षकों को TET परीक्षा देने के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह सेवा में रहते शिक्षकों के साथ अन्याय भी है। उन्होंने कहा कि वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे अनुभवी शिक्षकों को परीक्षा के नाम पर उलझाने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होगी और इसका सीधा असर गरीब व ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा। पहले भी उठाई गई थी मांग
जिला मंत्री श्रीधर मिश्रा ने बताया कि बीते अक्टूबर महीने में जिले सहित प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर शिक्षकों ने प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री- मानव संसाधन मंत्री को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में स्पष्ट मांग की गई थी कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET परीक्षा से मुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि उस दौरान कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। सरकार की इसी उदासीनता के चलते शिक्षक एक बार फिर आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं। अन्य सेवाओं से तुलना कर उठाए सवाल
मांडलिक मंत्री ज्ञानेंद्र ओझा ने कहा कि पुराने न्यायाधीशों से क्लैट की परीक्षा नहीं दिलाई जाती, पहले से चयनित आईएएस अधिकारियों से संघ लोक सेवा आयोग की नई प्रणाली की परीक्षा नहीं ली जाती, वर्षों से कार्यरत डॉक्टरों को नीट परीक्षा से मुक्त रखा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य सेवाओं में पुराने चयन पर नए नियम लागू नहीं किए जा रहे, तो केवल बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर TET परीक्षा का बोझ क्यों डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द अध्यादेश लाकर TET से मुक्ति नहीं दी, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। सैकड़ों शिक्षक रहे मौजूद
कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरेंद्र राय ने धन्यवाद ज्ञापन किया। प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष राजेश धर दुबे, जिला मंत्री श्रीधर मिश्रा, मांडलिक मंत्री ज्ञानेंद्र ओझा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरेंद्र राय सहित अनेक पदाधिकारी और सैकड़ों शिक्षक मौजूद रहे।


