सीवान डीएवी पीजी कॉलेज में शिक्षकों का आंदोलन:प्रिंसिपल पर दुर्व्यवहार-धमकी का आरोप, वे बोले- अनुशासन लागू किया इसलिए विरोध

सीवान डीएवी पीजी कॉलेज में शिक्षकों का आंदोलन:प्रिंसिपल पर दुर्व्यवहार-धमकी का आरोप, वे बोले- अनुशासन लागू किया इसलिए विरोध

डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य के कथित मनमाने रवैये के खिलाफ शिक्षक संघ और कॉलेज के शिक्षकों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक प्राचार्य के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन कर रहे शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के प्राचार्य का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण है और वे शिक्षकों के साथ लगातार दुर्व्यवहार, अपमान और प्रताड़ना कर रहे हैं। एससी-एसटी केस में फंसाने की धमकी दी
शिक्षकों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के अवैध रूप से वेतन कटौती की जा रही है और विरोध करने पर एससी-एसटी केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा महिला शिक्षिकाओं को विशेष अवकाश नहीं देने और एक सेवानिवृत्त शिक्षक को पेंशन के लाभ से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। आंदोलनकारी शिक्षकों का यह भी कहना है कि कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं की भी आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शिक्षकों ने अपने बैनर और पोस्टरों के माध्यम से प्राचार्य के खिलाफ नाराजगी जताई और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रदर्शन से जुड़ी 2 तस्वीरें.. शिक्षक मनमाने तरीके से कॉलेज आते-जाते थे
एक महिला शिक्षक ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्राचार्य द्वारा महिला शिक्षकों पर अनुचित टिप्पणियां की जाती हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय में शिकायत भी की गई है, लेकिन जब से इसकी जानकारी प्राचार्य को हुई है तब से उन्हें और अधिक परेशान किया जा रहा है। वहीं इस पूरे मामले पर जब डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामानन्द राम से बातचीत की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल से पहले कई शिक्षक मनमाने तरीके से कॉलेज आते-जाते थे। नियमित उपस्थिति और अनुशासन लागू
उन्होंने कहा कि अधिकांश शिक्षक कॉलेज के विकास कार्यों में ठेकेदारी से जुड़े हुए थे और कई शिक्षक देवरिया व गोरखपुर से आते थे, जो केवल हाजिरी बनाकर वापस चले जाते थे। प्राचार्य ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार नियमित उपस्थिति और अनुशासन लागू किया गया। जिससे कुछ शिक्षकों में असंतोष पैदा हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कुछ शिक्षक उनके कक्ष में आकर अभद्र व्यवहार कर चुके हैं, जिसकी शिकायत कुलपति और राजभवन को लिखित रूप में भेजी जा चुकी है। डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य के कथित मनमाने रवैये के खिलाफ शिक्षक संघ और कॉलेज के शिक्षकों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक प्राचार्य के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। आंदोलन कर रहे शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि कॉलेज के प्राचार्य का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण है और वे शिक्षकों के साथ लगातार दुर्व्यवहार, अपमान और प्रताड़ना कर रहे हैं। एससी-एसटी केस में फंसाने की धमकी दी
शिक्षकों का कहना है कि बिना किसी स्पष्ट कारण के अवैध रूप से वेतन कटौती की जा रही है और विरोध करने पर एससी-एसटी केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। इसके अलावा महिला शिक्षिकाओं को विशेष अवकाश नहीं देने और एक सेवानिवृत्त शिक्षक को पेंशन के लाभ से वंचित करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। आंदोलनकारी शिक्षकों का यह भी कहना है कि कॉलेज में वित्तीय अनियमितताओं की भी आशंका है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। शिक्षकों ने अपने बैनर और पोस्टरों के माध्यम से प्राचार्य के खिलाफ नाराजगी जताई और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। प्रदर्शन से जुड़ी 2 तस्वीरें.. शिक्षक मनमाने तरीके से कॉलेज आते-जाते थे
एक महिला शिक्षक ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्राचार्य द्वारा महिला शिक्षकों पर अनुचित टिप्पणियां की जाती हैं और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय में शिकायत भी की गई है, लेकिन जब से इसकी जानकारी प्राचार्य को हुई है तब से उन्हें और अधिक परेशान किया जा रहा है। वहीं इस पूरे मामले पर जब डीएवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामानन्द राम से बातचीत की गई तो उन्होंने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल से पहले कई शिक्षक मनमाने तरीके से कॉलेज आते-जाते थे। नियमित उपस्थिति और अनुशासन लागू
उन्होंने कहा कि अधिकांश शिक्षक कॉलेज के विकास कार्यों में ठेकेदारी से जुड़े हुए थे और कई शिक्षक देवरिया व गोरखपुर से आते थे, जो केवल हाजिरी बनाकर वापस चले जाते थे। प्राचार्य ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के बाद विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार नियमित उपस्थिति और अनुशासन लागू किया गया। जिससे कुछ शिक्षकों में असंतोष पैदा हो गया। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कुछ शिक्षक उनके कक्ष में आकर अभद्र व्यवहार कर चुके हैं, जिसकी शिकायत कुलपति और राजभवन को लिखित रूप में भेजी जा चुकी है।  

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