अंबेडकरनगर में टीबी मरीजों की जांच सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। जिले में पहली बार मेडिकल कॉलेज सदरपुर टांडा और सीएचसी रामनगर में चार मॉड्यूल की टूनाट मशीनें स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही, विभाग ने 139 गांवों को टीबी मुक्त घोषित करने के लिए चिह्नित किया है। जांच सुविधाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से सीएचसी भीटी और भियांव में भी चार मॉड्यूल की टूनाट मशीनें लगाई गई हैं। अब जिले में कुल छह टूनाट और दो सोबोनाट मशीनें उपलब्ध हैं, जिससे संभावित मरीजों की जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी। इसके अतिरिक्त, संभावित टीबी और कैंसर की प्रारंभिक जांच के लिए नौ ब्लॉकों में कुल 100 शिविरों का आयोजन किया जाएगा। पिछले लगभग साढ़े दस महीनों के अभियान में जिले में अब तक 1231 नए टीबी मरीज चिह्नित किए गए हैं। इन आंकड़ों को देखते हुए जांच अभियान लगातार जारी है। लगभग सौ शिविरों के माध्यम से पोर्टेबल एक्सरे मशीन द्वारा संभावित लक्षणों वाले मरीजों की पहचान की जाएगी। टीबी मुक्त अभियान के तहत, अधिकारी, कर्मचारी और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कुल 2,613 मरीजों को गोद लिया है। यह अभियान गांवों के साथ-साथ ईंट भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिकों, मलिन बस्तियों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर भी चलाया जा रहा है। इसमें जांच, दवाएं और मरीजों की नियमित जांच शामिल है। अभियान के संचालन के लिए नौ ब्लॉकों में 10 टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांवों का भ्रमण कर लोगों की जांच कर रही हैं और टीबी के लक्षण मिलने पर तत्काल दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। अभियान के नोडल अरविंद पाठक ने बताया कि जिले में कुल 2,850 टीबी रोगी हैं, जिनमें से 2,613 रोगियों को गोद लिया गया है। इन रोगियों को हर महीने पोषण भत्ता के साथ पोषण पोटली भी प्रदान की जा रही है। जिले में टीबी उपचार की सफलता दर 94 प्रतिशत है। जनपद मंडल स्तर पर दूसरे स्थान पर और राज्य स्तर पर 20वें स्थान पर है।


