छापर. तालछापर अभयारण्य की शांत व प्राकृतिक गोद में शनिवार को एक खास पल देखने को मिला, जब विश्वप्रसिद्ध भारतीय संगीतकार, तीन बार के ग्रैमी अवार्ड विजेता और पर्यावरण प्रेमी रिकी केज पहली बार यहां पहुंचे। केज ने यहां की अद्भुत जैव विविधता को नजदीक से देखा और काले हिरणों के झुंड, देशी-विदेशी पक्षियों की चहचहाहट, रेप्टाइल्स और दुर्लभ वनस्पतियों के बारे में विस्तार से जानकारी ली तथा प्रसिद्ध काले हिरणों के फोटो ली। प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत होते हुए उन्होंने कहा कि “तालछापर भारत के सबसे खूबसूरत अभयारण्यों में से एक है, यहां आकर मन को सुकून मिला।”
उन्होंने वन्यजीवों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “प्रकृति और वन्यजीव हमारे अस्तित्व का अहम हिस्सा हैं। मेरा संगीत भी हमेशा प्रकृति से प्रेरित रहा है। जहां भी जाता हूं, वहां की प्रकृति मुझे कुछ नया सिखाती है।” उन्होंने लोगों से प्रकृति संरक्षण के लिए जागरूक होने और प्रयास करने की अपील की।
शोध करने वाले छात्रों से मिले
प्रकृति और संगीत के अनोखे संबंध को साझा करते हुए केज (Grammy Award Winner Ricky Kej) ने कहा कि “प्रकृति अपने आप में एक संगीत है-हर हवा की सरसराहट, पक्षियों की आवाज और जंगल की खामोशी में एक लय छिपी होती है। इस दौरान केज ने अभयारण्य में जीव जंतुओं पर शोध करने वाले छात्रों से भी मुलाकात कर जानकारियां साझा की।
इस दौरान क्षेत्रीय वन अधिकारी एवं पक्षी विशेषज्ञ उमेश बागोतिया ने उन्हें अभयारण्य के जीव-जंतुओं और उनकी विशेषताओं से अवगत कराया। अधिकारियों व स्टाफ ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। गौरतलब है कि रिकी केज (Ricky Kej) का पारिवारिक संबंध चूरू से रहा है। उनके पिता राम ज्ञान चूरू के मूल निवासी थे। उन्हें वर्ष 2025 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा जा चुका है तथा 2023 में संयुक्त राष्ट्र का सद्भावना राजदूत भी बनाया गया।
साथ ही 13 हजार 944 आदिवासी बच्चों द्वारा राष्ट्रगान की रिकॉर्डिंग का उनका अनोखा प्रयास गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज है। लाडनूं में जैन विश्व भारती (Jain Vishva Bharati Ladnun) के महाश्रमण स्पोर्ट्स ग्राउंड में रविवार को केज का सीरेन सिंफनी कंसर्ट होगा। इस दौरान एसीएफ क्रान्ति सिंह सहित स्टाफ ने केज का स्वागत किया। इस दौरान सिंगर श्रद्धा गणेश (Singer Shradha Ganesh), राकेश कठोतिया, राज सुराना, अभय जैन सहित कई लोग मौजूद रहे।


