होली पर बाजार में बिक रहा है ‘मीठा जहर’, खुद को फूड पॉइजनिंग से कैसे बचाएं? पढ़ें डॉक्टर की खास सलाह

होली पर बाजार में बिक रहा है ‘मीठा जहर’, खुद को फूड पॉइजनिंग से कैसे बचाएं? पढ़ें डॉक्टर की खास सलाह

Holi: होली का त्योहार रंग और गुलाल के साथ ही तरह-तरह की मिठाइयों के लिए भी खास होता है। लेकिन जैसे ही त्योहार नजदीक आता है, बाजारों में केमिकल वाले रंग और गुलाल के साथ-साथ नकली और मिलावटी मिठाइयां भी मिलने लगती हैं। इसलिए होली के रंगों के साथ-साथ मिठाई खरीदते समय भी सावधानी रखना जरूरी है। आइए आज की स्टोरी में डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल गोरखपुर के कार्डियोलॉजी विभाग में तैनात डॉ. रोहित गुप्ता से जानते हैं कि कैसे मिलावटी मिठाइयां हमारे शरीर को प्रभावित कर सकती हैं और इनसे बचने के लिए क्या करना चाहिए।

मिलावटी घी और ट्रांस फैट का खतरा

डॉ. रोहित गुप्ता के अनुसार, कई बार मिठाइयों में इस्तेमाल किया गया वनस्पति घी असली नहीं होता और इसमें ट्रांस फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। इसे देसी घी के नाम पर बेचा जाता है। ट्रांस फैट शरीर में जाकर खून की नलिकाओं में जमा हो जाता है। जिससे खून की नलिकाएं ब्लॉक हो सकती हैं। इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। 

आर्टिफिशियल स्वीटनर और रंग का असर

आजकल बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में कृत्रिम मिठास यानी आर्टिफिशियल स्वीटनर और रंगों का भी इस्तेमाल किया जाता है। डॉ. रोहित गुप्ता बताते हैं कि लंबे समय तक इस तरह की मिठाइयां खाने से डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही, लगातार केमिकल युक्त भोजन खाने से लिवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए मिलावटी मिठाइयों का सेवन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए।

फूड प्वाइजनिंग

कुछ मामलों में मिलावटी मिठाई खाने के तुरंत बाद पेट दर्द, उल्टी, दस्त और जी मिचलाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। हालांकि कई बार इसका असर धीरे-धीरे भी शरीर पर दिख सकता है। 

क्या करें और क्या न करें

  • हमेशा भरोसेमंद दुकानों से ही मिठाई खरीदें।
  • बहुत ज्यादा चाशनी और घी वाली मिठाइयों का सेवन सीमित मात्रा में करें।
  • अगर मिठाई में इस्तेमाल हुए दूध, दही और घी की गुणवत्ता पर शक हो तो इसके बजाय फल और सूखे मेवे वाली मिठाई खरीदें।
  • हार्ट, हाई बीपी या डायबिटीज के मरीज सावधानीपूर्वक मिठाई खाएं।

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