कैमूर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई नीतियों के विरोध में स्वर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। परशुराम सेना, करणी सेना और अन्य स्वर्ण संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भभुआ के नगर पालिका मैदान से एकता चौक तक आक्रोश मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी और कैमूर जिला भाजपा प्रवक्ता विश्वंभर तिवारी ने UGC के विवादास्पद फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया। उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे अंतिम जीत नहीं माना जा सकता। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक UGC कानून पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता या स्वर्ण समाज के हितों के खिलाफ बनाई गई नीतियां रद्द नहीं होतीं, तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि विश्वविद्यालय में सभी छात्रों को समान माना जाए, इसलिए UGC कानून को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इस मार्च में भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्थानीय युवाओं और स्वर्ण समाज के लोगों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि समाज की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि इसमें ‘रेल रोको’ जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। कैमूर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई नीतियों के विरोध में स्वर्ण समाज ने प्रदर्शन किया। परशुराम सेना, करणी सेना और अन्य स्वर्ण संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भभुआ के नगर पालिका मैदान से एकता चौक तक आक्रोश मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला दहन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष विनोद तिवारी और कैमूर जिला भाजपा प्रवक्ता विश्वंभर तिवारी ने UGC के विवादास्पद फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया। उन्होंने न्यायपालिका का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे अंतिम जीत नहीं माना जा सकता। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक UGC कानून पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता या स्वर्ण समाज के हितों के खिलाफ बनाई गई नीतियां रद्द नहीं होतीं, तब तक आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि विश्वविद्यालय में सभी छात्रों को समान माना जाए, इसलिए UGC कानून को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। इस मार्च में भाजपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्थानीय युवाओं और स्वर्ण समाज के लोगों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि समाज की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि इसमें ‘रेल रोको’ जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।


