प्रयागराज में बटुकों (बालकों) के यौन शोषण के आरोपों को लेकर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ ही पॉक्सो एक्ट की धारा 22 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है। शंकराचार्य का कहना है कि कानून के मुताबिक अगर कोई किसी पर झूठा केस करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
आरोपों पर शंकराचार्य की सफाई
शंकराचार्य ने दावा किया कि जिन दो लड़कों के यौन शोषण की बात कही जा रही है, वे लंबे समय से आशुतोष ब्रह्मचारी के पास ही रह रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर मेडिकल रिपोर्ट में बच्चों के साथ गलत होने की पुष्टि हुई है, तो इसका जिम्मेदार वही व्यक्ति है जिसके पास बच्चे रह रहे थे। स्वामी जी ने साफ किया कि उनका उन बच्चों से कोई संपर्क नहीं था और वे कभी उनके गुरुकुल भी नहीं आए।
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साजिश का लगाया आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों का बोलबाला है जो जांच को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने एक व्हाट्सएप ग्रुप का हवाला देते हुए कहा कि उनके खिलाफ जानबूझकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई साधु-संत उनके साथ हैं, लेकिन सरकार और अपराधियों के डर से वे खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं।
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मठ और महिला के दावों का खंडन
शंकराचार्य ने प्रयागराज की एक महिला द्वारा श्री विद्यामठ को लेकर किए गए दावों को भी गलत बताया। महिला ने मठ में लिफ्ट और स्विमिंग पूल जैसी सुख-सुविधाओं के होने का आरोप लगाया था, जिसे स्वामी जी ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि महिला का परिवार मठ से जुड़ा था, लेकिन जब उन्हें मठ खाली करने को कहा गया, तो वे नाराज होकर झूठे बयान देने लगीं।


