सहरसा सदर अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। रविवार देर रात सदर एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने सदर एसडीपीओ आलोक कुमार और सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार के साथ सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति, कार्यप्रणाली और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना था। लगातार शिकायतों के बाद हुआ औचक निरीक्षण एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने बताया कि प्रशासन को पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सदर अस्पताल में कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी बिना सूचना के ड्यूटी से गायब रहते हैं। इससे खासकर रात के समय इलाज के लिए आने वाले मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इन्हीं शिकायतों की सच्चाई जांचने के लिए यह औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में डॉक्टर सहित चार कर्मी नदारद निरीक्षण के दौरान अस्पताल में एक डॉक्टर, दो ममता स्टाफ और एक ओटी असिस्टेंट ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल नाराजगी जाहिर की। खासकर प्रसव कक्ष में डॉक्टर की अनुपस्थिति को बेहद गंभीर माना गया, क्योंकि यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से जुड़ा मामला है। शो-कॉज नोटिस का निर्देश एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने निरीक्षण के बाद अनुपस्थित पाए गए सभी कर्मियों के खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि संबंधित कर्मियों की ओर से संतोषजनक और तर्कसंगत जवाब नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण से मचा अस्पताल में हड़कंप रात में अचानक प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई कर्मी इधर-उधर भागते नजर आए। हालांकि रविवार की रात होने के कारण मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन प्रशासन ने माना कि यदि उसी समय कोई गंभीर मरीज या प्रसव का मामला आ जाता, तो स्थिति बेहद चिंताजनक हो सकती थी। बिचौलियों और अवैध गतिविधियों पर भी नजर एसडीएम ने यह भी कहा कि सदर अस्पताल में सक्रिय बिचौलियों और अवैध गतिविधियों की शिकायतें भी मिल रही हैं। मरीजों से अवैध वसूली, दलालों की भूमिका और अन्य अनियमितताओं पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। नियमित होंगे औचक निरीक्षण प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने बताया कि आगे भी इस तरह के औचक निरीक्षण नियमित रूप से किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया जा सके। प्रशासन का उद्देश्य सदर अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करना और आम जनता को समय पर, बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। आम लोगों में जगी उम्मीद प्रशासन की इस सख्ती के बाद आम लोगों में उम्मीद जगी है कि सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होगा। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निगरानी करता रहा, तो डॉक्टरों और कर्मियों की मनमानी पर रोक लगेगी और सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा फिर से मजबूत होगा। सहरसा सदर अस्पताल में लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। रविवार देर रात सदर एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने सदर एसडीपीओ आलोक कुमार और सदर थानाध्यक्ष सुबोध कुमार के साथ सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति, कार्यप्रणाली और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेना था। लगातार शिकायतों के बाद हुआ औचक निरीक्षण एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने बताया कि प्रशासन को पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सदर अस्पताल में कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी बिना सूचना के ड्यूटी से गायब रहते हैं। इससे खासकर रात के समय इलाज के लिए आने वाले मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। इन्हीं शिकायतों की सच्चाई जांचने के लिए यह औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में डॉक्टर सहित चार कर्मी नदारद निरीक्षण के दौरान अस्पताल में एक डॉक्टर, दो ममता स्टाफ और एक ओटी असिस्टेंट ड्यूटी से अनुपस्थित पाए गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए तत्काल नाराजगी जाहिर की। खासकर प्रसव कक्ष में डॉक्टर की अनुपस्थिति को बेहद गंभीर माना गया, क्योंकि यह सीधे तौर पर मरीजों की जान से जुड़ा मामला है। शो-कॉज नोटिस का निर्देश एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने निरीक्षण के बाद अनुपस्थित पाए गए सभी कर्मियों के खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि संबंधित कर्मियों की ओर से संतोषजनक और तर्कसंगत जवाब नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई तय है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण से मचा अस्पताल में हड़कंप रात में अचानक प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई कर्मी इधर-उधर भागते नजर आए। हालांकि रविवार की रात होने के कारण मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन प्रशासन ने माना कि यदि उसी समय कोई गंभीर मरीज या प्रसव का मामला आ जाता, तो स्थिति बेहद चिंताजनक हो सकती थी। बिचौलियों और अवैध गतिविधियों पर भी नजर एसडीएम ने यह भी कहा कि सदर अस्पताल में सक्रिय बिचौलियों और अवैध गतिविधियों की शिकायतें भी मिल रही हैं। मरीजों से अवैध वसूली, दलालों की भूमिका और अन्य अनियमितताओं पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय की जाएगी। नियमित होंगे औचक निरीक्षण प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगी। एसडीएम श्रेयांश तिवारी ने बताया कि आगे भी इस तरह के औचक निरीक्षण नियमित रूप से किए जाएंगे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाया जा सके। प्रशासन का उद्देश्य सदर अस्पताल की व्यवस्था को दुरुस्त करना और आम जनता को समय पर, बेहतर और पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। आम लोगों में जगी उम्मीद प्रशासन की इस सख्ती के बाद आम लोगों में उम्मीद जगी है कि सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होगा। मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निगरानी करता रहा, तो डॉक्टरों और कर्मियों की मनमानी पर रोक लगेगी और सरकारी अस्पतालों पर लोगों का भरोसा फिर से मजबूत होगा।


