Supreme Court का झटका: ट्रंप के अवैध टैरिफ के 130 अरब डॉलर अब किसे मिलेंगे ?

Supreme Court का झटका: ट्रंप के अवैध टैरिफ के 130 अरब डॉलर अब किसे मिलेंगे ?

Supreme Court : अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की व्यापार नीति को एक बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा ‘इमरजेंसी शक्तियों’ के तहत लगाए गए आयात शुल्क (Global Tariff) को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि राष्ट्रपति ने अपनी संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन किया है। इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि टैरिफ के रूप में वसूले गए 130 अरब डॉलर ( 130 Billion Refund) से अधिक की रकम (Tariffs, Economy) का क्या होगा और यह किसे मिलेगी?

130 अरब डॉलर अब किसे मिलेंगे ? (130 Billion Refund)

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को तो अवैध करार दे दिया, लेकिन रिफंड (पैसे वापसी) को लेकर कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है। कोर्ट ने यह तय करने का काम निचली अदालतों पर छोड़ दिया है, जिसके कारण अब एक लंबी कानूनी लड़ाई होने की पूरी संभावना है। तकनीकी और कानूनी रूप से, यह पैसा उन अमेरिकी आयातकों (Importers), कंपनियों और व्यवसायों को वापस मिलना चाहिए जिन्होंने माल मंगाते समय यह शुल्क सीधे तौर पर अमेरिकी सरकार (US Customs) को चुकाया है।

आम जनता का नुकसान

अर्थशास्त्रियों जैसे येल यूनिवर्सिटी के बजट स्लैब के अनुसार, कंपनियों ने इस टैरिफ का बोझ कीमतें बढ़ाकर आम अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही डाल दिया था। अनुमान है कि इससे हर अमेरिकी परिवार को औसतन $1,751 का नुकसान हुआ है। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम जैसे राजनेताओं ने मांग की है कि अवैध रूप से वसूला गया यह पैसा ब्याज समेत तुरंत अमेरिकी परिवारों और वर्किंग क्लास को वापस किया जाना चाहिए।

ट्रंप के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

डोनाल्ड ट्रंप ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का सहारा लेते हुए राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर दुनिया भर के देशों (चीन, कनाडा, मैक्सिको, भारत आदि) से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लगा दिया था। कुछ चीनी उत्पादों पर यह ड्यूटी 145% तक पहुँच गई थी। अप्रैल 2025 में कैलिफोर्निया सहित कई राज्यों और व्यापारिक समूहों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ?

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार ‘अमेरिकी संसद’ (Congress) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। IEEPA कानून राष्ट्रपति को आपातकाल में विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने का अधिकार जरूर देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि राष्ट्रपति इसका इस्तेमाल एकतरफा नए टैक्स (टैरिफ) लगाने के लिए करें।

डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया

ट्रंप ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे “शर्मनाक” (Disgrace) बताया। हालांकि, उनका प्रशासन अब हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप व्यापार कानून 1974 की ‘धारा 122’ जैसे अन्य कानूनी विकल्पों के जरिए दोबारा टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

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