सुप्रीम कोर्ट बोला- एसिड अटैक पर केंद्र सख्त कानून बनाए:आरोपियों को जब तक दर्दनाक सजा नहीं होगी, ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे

सुप्रीम कोर्ट बोला- एसिड अटैक पर केंद्र सख्त कानून बनाए:आरोपियों को जब तक दर्दनाक सजा नहीं होगी, ऐसे अपराध नहीं रुकेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एसिड अटैक मामलों में दोषियों के कड़ी सजा की जरूरत पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा- जब तक सजा आरोपी के लिए दर्दनाक नहीं होगी, ऐसे अपराध रुकने वाले नहीं हैं। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस आर. महादेवन, जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा- यहां सुधारवादी दंड सिद्धांत की कोई जगह नहीं है। ऐसे मामलों में दहेज हत्या की तरह आरोपी को ही अपनी बेगुनाही साबित करनी पड़ सकती है। बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार कानून बदलने पर विचार करे। 4 हफ्ते में सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश एसिड अटैक मामलों से जुड़े आंकड़े दें। इनमें साल दर साल दर्ज मामलों की संख्या, कोर्ट में उनकी स्थिति और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़े कदमों की जानकारी शामिल करे। सीजेआई ने सवाल किया कि दोषियों की संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को मुआवजा देने पर क्यों नहीं विचार किया जा सकता। बेंच ने हरियाणा की शाहीना मलिक की दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। शाहीना मलिक खुद एसिड अटैक सर्वाइवर हैं। कोर्ट ने यह जानकारी भी मांगी
याचिकाकर्ता बोली- सभी आरोपी बरी हुए याचिकाकर्ता शाहीना मलिक ने कोर्ट को बताया कि उनके मामले में सभी आरोपी बरी हो चुके हैं। इसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की है। कोर्ट ने शाहीन की स्थिति को देखते हुए उन्हें मुफ्त कानूनी मदद देने की पेशकश की। साथ ही हा कि शाहीन अपनी पसंद के अच्छे वकीलों की सेवाएं ले सकती हैं। एसिड अटैक के दौरान 26 साल की थीं शाहीना शाहीना के मुताबिक एसिड अटैक के वक्त उनकी उम्र 26 साल थी। अब वे 42 साल की हैं। अभी भी अंतिम फैसले का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि 16 साल तक अदालतों के चक्कर लगाने के बाद भी आरोपियों को बरी कर दिया गया। यह बहुत ही निराशाजनक है। यूपी में सबसे ज्यादा 138 मामले पेंडिंग सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि अब तक 15 हाईकोर्ट से एसिड अटैक मामलों से जुड़े पेंडिस केस की जानकारी मिली है। आंकड़ों के मुताबि उत्तर प्रदेश में 198, गुजरात में 114, पश्चिम बंगाल में 60, बिहार में 68 और महाराष्ट्र में 58 मामले अब भी पेंडिग हैं। कोर्ट ने कहा कि इन आंकड़ों को देखते हुए हाईकोर्ट से ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देने की बात कही है। साथ ही तय समय में निपटाने पर विचार करने का कहा गया है। सभी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी पीड़ितों के पुनर्वास, मुआवजा और इलाज से जुड़ी योजनाओं का ब्योरा देने का निर्देश दिया दिया है। इससे पहले 4 दिसंबर को कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से देशभर में लंबित ऐसे मामलों की जानकारी मांगी थी।

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