सुपौल CO ने सरकारी जमीन का किया अवैध मॉडिफिकेशन:सदर CO पर FIR के आदेश, DM ने सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

सुपौल CO ने सरकारी जमीन का किया अवैध मॉडिफिकेशन:सदर CO पर FIR के आदेश, DM ने सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश

सुपौल जिला में जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सदर अंचलाधिकारी (CO) आनंद मंडल पर आरोप है कि उन्होंने दलालों के साथ मिलीभगत कर बिहार सरकार की कीमती जमीन का अवैध तरीके से परिमार्जन कर दिया। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और जिलाधिकारी सावन कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी CO के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया है। लोहियानगर चौक की जमीन से जुड़ा मामला पूरा मामला सुपौल के लोहियानगर चौक स्थित खाता संख्या 458 की जमीन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि यह जमीन सरकारी श्रेणी में दर्ज थी, लेकिन परिमार्जन की प्रक्रिया के जरिए इसके स्वरूप में बदलाव कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस बदलाव का उद्देश्य जमीन को निजी उपयोग के लिए तैयार करना था। इसके लिए अभिलेखों में हेरफेर किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। दलालों से मिलीभगत का आरोप स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में दलालों की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि CO आनंद मंडल ने बिचौलियों के साथ मिलकर यह पूरा खेल किया। लोगों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर जमीन का परिमार्जन बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के संभव नहीं है। इस वजह से अब पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। जांच में मिली गड़बड़ी, DM ने लिया एक्शन मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी सावन कुमार ने तुरंत जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में ही गड़बड़ी सामने आने पर डीएम ने सख्त कदम उठाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आरोपी CO के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए। सरकारी जमीन से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: DM डीएम सावन कुमार ने साफ कहा है कि सरकारी संपत्ति के साथ किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए, ताकि पूरे घोटाले की सच्चाई सामने आ सके। जिले में मचा हड़कंप इस बड़े खुलासे के बाद सुपौल जिले के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। वहीं, आम लोगों के बीच भी इस घोटाले को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें फिलहाल, इस पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की प्रक्रिया जारी है और विस्तृत जांच की तैयारी की जा रही है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इस घोटाले में कौन-कौन लोग शामिल हैं और कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुपौल जिला में जमीन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। सदर अंचलाधिकारी (CO) आनंद मंडल पर आरोप है कि उन्होंने दलालों के साथ मिलीभगत कर बिहार सरकार की कीमती जमीन का अवैध तरीके से परिमार्जन कर दिया। मामला सामने आते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और जिलाधिकारी सावन कुमार ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी CO के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया है। लोहियानगर चौक की जमीन से जुड़ा मामला पूरा मामला सुपौल के लोहियानगर चौक स्थित खाता संख्या 458 की जमीन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि यह जमीन सरकारी श्रेणी में दर्ज थी, लेकिन परिमार्जन की प्रक्रिया के जरिए इसके स्वरूप में बदलाव कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस बदलाव का उद्देश्य जमीन को निजी उपयोग के लिए तैयार करना था। इसके लिए अभिलेखों में हेरफेर किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। दलालों से मिलीभगत का आरोप स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में दलालों की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोप है कि CO आनंद मंडल ने बिचौलियों के साथ मिलकर यह पूरा खेल किया। लोगों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर जमीन का परिमार्जन बिना उच्च स्तर की मिलीभगत के संभव नहीं है। इस वजह से अब पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। जांच में मिली गड़बड़ी, DM ने लिया एक्शन मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी सावन कुमार ने तुरंत जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में ही गड़बड़ी सामने आने पर डीएम ने सख्त कदम उठाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि आरोपी CO के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और पूरे मामले की विस्तृत जांच कराई जाए। सरकारी जमीन से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं: DM डीएम सावन कुमार ने साफ कहा है कि सरकारी संपत्ति के साथ किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाए, ताकि पूरे घोटाले की सच्चाई सामने आ सके। जिले में मचा हड़कंप इस बड़े खुलासे के बाद सुपौल जिले के प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। वहीं, आम लोगों के बीच भी इस घोटाले को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है। लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें फिलहाल, इस पूरे मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की प्रक्रिया जारी है और विस्तृत जांच की तैयारी की जा रही है। अब सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सके कि इस घोटाले में कौन-कौन लोग शामिल हैं और कितनी बड़ी साजिश रची गई थी। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी जमीन की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  

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