New Leave Policy : राज्य के स्कूलों में अब सर्दियों और गर्मियों के दीर्घकालीन अवकाश अब समान हो जाएंगे। बता दें कि उत्तराखंड में अभी तक गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों के दिन भौगोलिक स्थितियों के अनुसार से तय थे। अब सभी स्कूलों में गर्मी-सर्दी में 16-16 दिन की छुट्टी रहेगी। अभी 5000 मीटर से ज्यादा ऊंचे इलाके के स्कूलों में सर्दी में 37 दिन व गर्मी में 11 दिन छुट्टी होती है। निचले इलाकों में गर्मियों में 35 जबकि सर्दियों में 13 दिन की छुट्टी होती है। अब सभी स्कूलों में गर्मियों का दीर्घकालीन अवकाश 15 से 30 जून और सर्दियों का एक जनवरी से 16 जनवरी तक होंगी। इससे 48 दिन के दीर्घकालीन अवकाश में 16 दिन कम हो जाएंगे और सिर्फ 32 दिन ही छुट्टी रहेगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नए टाइम टेबिल के अनुसार स्कूलों में सालभर में 200 दिन पढ़ाई होगी। अभी पढ़ाई के लिए 184 दिन ही मिल रहे हैं। जिलों से सुझाव मांगे हैं, इसके बाद ही प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। इधर, इस प्रस्ताव का विरोध भी हो रहा है।
पहाड़ के बच्चे होंगे परेशान
छुट्टियां कम होने से सर्वाधिक परेशानी राज्य के पर्वतीय इलाकों के बच्चों को होगी। बता दें कि राज्य के पर्वतीय इलाकों में दीवाली के बाद से भीषण ठंड हो जाती है। मौजूदा समय में दिसंबर आखिरी सप्ताह से एक फरवरी तक स्कूलों में सर्दियों का अवकाश रहता है। सर्वाधिक ठंड जनवरी दूसरे पखवाड़े से शुरू होती है। जनवरी के पूरे महीने में ही सर्वाधिक बारिश और बर्फबारी होती है। इस साल भी राज्य में 23 जनवरी से बारिश-बर्फबारी की शुरुआत हुई थी, जोकि फरवरी शुरुआत तक जारी रही। भीषण ठंड और बर्फबारी के बीच बच्चों का स्कूल पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। बारिश और बर्फबारी के बीच हादसों का भी खतरा रहता है।
10 दिन बस्ता रहित
उत्तराखंड में शिक्षा विभाग की ओर से जारी वार्षिक टाइम टेबल में स्कूलों के कार्यदिवस के कुल 251 दिन मिल रहे हैं। इसमें परीक्षा, मूल्यांकन के 30 दिन, बस्ता रहित 10 दिन के अलावा 11 दिन आपदा, कांवड़ मेला जैसी छुट्टियों के लिए आरक्षित होने पर स्कूलों में पढ़ाई के लिए 200 दिन बच रहे हैं। स्कूलों में छुट्टियां कम करने और अवकाश की व्यवस्था बदलने को लेकर शिक्षकों और अभिभावकों में भी आक्रोश है। मैदानी इलाकों के अभिभाव गर्मियों में एक माह का अवकाश के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि पूरे जून में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप रहता है। मैदानी इलाकों के अभिभावक सर्दियों में एक माह के अवकाश के पक्ष में हैं।


