जयपुर . एलपीजी की किल्लत का असर अब उद्योग-धंधों तक गहराने लगा है। शहर की हजारों इंडस्ट्रीज प्रभावित हो रही हैं और सैकड़ों फैक्टरियां बंद होने की कगार पर हैं। उद्यमियों का कहना है कि यदि दो-तीन दिन में गैस की आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो कई उद्योगों को ताले लगाने पड़ सकते हैं।
सबसे अधिक असर सांगानेर की रंगाई-छपाई फैक्टरियों पर पड़ रहा है। यहां 1900 से अधिक फैक्टरियों में कामकाज प्रभावित हो चुका है। कई इकाइयां आधे दिन ही चल रही हैं, तो कुछ में केवल अर्जेंट ऑर्डर का कपड़ा तैयार हो पा रहा है। बगरू स्थित जयपुर टेक्सटाइल्स पार्क की फैक्टरियों पर भी इसका असर दिखने लगा है। वहीं विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र की एक हजार से अधिक फैक्टरियां गैस संकट से जूझ रही हैं। इनमें सबसे अधिक फेब्रिकेशन इकाइयां प्रभावित हैं। कई उद्यमी मुंह मांगे दाम चुकाकर सिलेंडर की व्यवस्था कर रहे हैं। शहर के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में भी यही हालात हैं।
मिठाई व फास्टफूड कारोबार पर असर
जयपुर हलवाई समिति अध्यक्ष राजेन्द्र रावत के अनुसार सिलेंडर नहीं मिलने से शहर में मिठाई और फास्टफूड की दुकानें बंद होने लगी हैं। कुछ रेस्टोरेंट संचालकों ने कचौरी-समोसे बनाना बंद कर दिया है। गलियों और कॉलोनियों की मिठाई की दुकानों पर ताजा मिठाई व चाट बनना ठप हो गया है। कई रेस्टोरेंट संचालक मजबूरी में कोयले की भट्टी पर काम कर रहे हैं, हालांकि इन पर काम करने वाले हलवाई बहुत कम हैं।
25 फीसदी चाट ठेले बंद
शहर में 20 हजार से अधिक थड़ी-ठेलों पर चाट मिलती है, जिनमें से करीब 25 प्रतिशत ठेलों पर बिक्री बंद हो गए हैं। हैरिटेज सिटी थड़ी ठेला यूनियन के अध्यक्ष बनवारी लाल शर्मा ने बताया कि 5 हजार से अधिक ठेले बंद हो चुके हैं। ठेले वाले घरेलू सिलेंडरों पर काम कर रहे हैं। दो से ढाई गुना अधिक कीमत चुकाकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है, जिससे चाट के दाम भी बढ़ गए हैं।
यूनिट बंद होने की कगार पर
वीकेआइ की 1000 से अधिक फैक्टरियां प्रभावित हो रही हैं, 100 से अधिक यूनिट तो बंद होने की कगार पर है।
– अरुण गुप्ता, अध्यक्ष, विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
सांगानेर प्रिंटिंग उद्योग से जुड़ी 1900 से अधिक इकाइयों पर गैस की कमी का असर पड़ा है। इकाइयां आधे दिन चल रही है।
– राजेन्द्र जींदगर, सचिव, सांगानेर कपड़ा रंगाई छपाई एसोसिएशन


