चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के उद्यान विभाग ने जैविक स्ट्रॉबेरी की खेती का विशेष प्रयोग शुरू किया है। यह पहल उद्यान विभाग के डीन प्रो. विवेक कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में की जा रही है, जिसके परिणाम किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए अहम साबित हो सकते हैं। प्रो. विवेक त्रिपाठी ने बताया कि बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और रासायनिक खाद व कीटनाशकों के उपयोग से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव चिंता का विषय हैं। स्ट्रॉबेरी जैसे संवेदनशील फल पर रसायनों का असर जल्दी होता है और यह कीटों व बीमारियों की चपेट में भी आसानी से आ जाता है। इन्हीं कारणों से उद्यान विभाग ने स्ट्रॉबेरी की खेती को पूरी तरह जैविक पद्धति से करने का निर्णय लिया है। इस प्रयोग में अमृत पानी, बीजामृत, पंचगव्य, एजेक्टो वेक्टर, बायोफर्टिलाइज़र, वर्मी कम्पोस्ट और गोबर की खाद जैसे जैविक उत्पादों का उपयोग किया जा रहा है। फलों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाई गई है, ताकि फल सीधे जमीन के संपर्क में न आएं। पूरी खेती 100 प्रतिशत जैविक विधि से की जा रही है। विश्वविद्यालय के उद्यान में पिछले महीने स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए गए थे, जो अब तेजी से बढ़ रहे हैं। फरवरी और मार्च के दौरान इनमें फूल और फल आने की उम्मीद है। प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि इससे पहले आम, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट में जैव उत्प्रेरकों के प्रयोग से फलों के आकार, वजन, स्वाद और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। इसी अनुभव के आधार पर स्ट्रॉबेरी में भी बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। 6 महीने में आय देने वाली फसल
स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि यह फसल महज 6 महीने में आमदनी देना शुरू कर देती है। यही वजह है कि इसे किसानों के लिए “वरदान” बताया जा रहा है। स्ट्रॉबेरी को गमलों में, टेरेस गार्डनिंग और रूफ गार्डनिंग के रूप में भी उगाया जा सकता है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी अपनी छत पर इस पौष्टिक और स्वादिष्ट फल की खेती कर सकते हैं। उद्यान विभाग की नर्सरी में स्ट्रॉबेरी के पौधे उपलब्ध हैं। इच्छुक किसान यहां से पौधे लेकर खेती शुरू कर सकते हैं और फरवरी-मार्च में जैविक, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली स्ट्रॉबेरी का उत्पादन कर सकते हैं। विभाग की यह पहल न केवल स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे रही है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक मजबूत कदम मानी जा रही है।


