झुंझुनूं। यदि लक्ष्य साफ हो, मेहनत नियमित हो और आत्मविश्वास बना रहे तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। झुंझुनूं की राजकुमारी पारीक ने यह बात सच कर दिखाया है। श्याम नगर, गुढ़ा रोड निवासी राजकुमारी ने महज 19 वर्ष 126 दिन की उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) बनकर देश की सबसे युवा महिला सीए बनने का रेकॉर्ड अपने नाम किया है।
इससे पहले यह रेकॉर्ड मध्यप्रदेश के मुरैना की नंदिनी अग्रवाल के नाम था, जिन्होंने 19 वर्ष 330 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।
15 साल की उम्र से शुरू की तैयारी
राजकुमारी बताती हैं कि उन्होंने करीब 15 वर्ष की उम्र से ही सीए की तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने रोजाना करीब 4 से 5 घंटे की नियमित पढ़ाई और कंसेप्ट को समझने पर ध्यान दिया। उनका मानना है कि किसी भी विषय को अच्छी तरह समझने के बाद उसका बार-बार रिविजन करना ही सफलता की असली कुंजी है।
आर्टिकलशिप के दौरान मिला लक्ष्य
सीए बनने का लक्ष्य उन्हें आर्टिकलशिप के दौरान मिला। एक दिन उनके मेंटर नितिन गुप्ता ने बताया कि यदि वह फाइनल परीक्षा जल्दी पास कर लें तो सबसे कम उम्र की महिला सीए बन सकती हैं। इसके बाद राजकुमारी ने इसे अपना लक्ष्य बना लिया और उसी दिशा में तैयारी शुरू कर दी।
पहली असफलता से नहीं टूटा हौसला
राजकुमारी पहले प्रयास में परीक्षा पास नहीं कर सकीं, लेकिन उन्होंने इसे निराशा नहीं बनने दिया। उस समय परीक्षा शेड्यूल में अचानक बदलाव हो गया था और दो विषयों की तैयारी पूरी नहीं हो पाई थी। इसके बावजूद उन्होंने सकारात्मक सोच बनाए रखी और अगले प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
परिवार और शिक्षकों का मिला सहयोग
राजकुमारी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं। उनके पिता ने उन पर भरोसा जताते हुए आर्टिकलशिप के लिए मुंबई भेजा, जबकि फाइनल परीक्षा की तैयारी उन्होंने जयपुर में रहकर की। अब राजकुमारी कॉरपोरेट क्षेत्र में अनुभव हासिल कर भविष्य की दिशा तय करना चाहती हैं।
युवाओं को संदेश: ओवरकॉन्फिडेंस से बचें
राजकुमारी का कहना है कि सीए कोर्स कठिन जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। नियमित मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच से कोई भी विद्यार्थी अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। साथ ही उन्होंने युवाओं को ओवरकॉन्फिडेंस से बचने और निरंतर पढ़ाई करने की सलाह दी।
समय प्रबंधन और ग्रुप स्टडी का सहारा
राजकुमारी ने पढ़ाई के साथ समय प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया। जरूरत पड़ने पर दोस्तों के साथ ग्रुप स्टडी कर विषयों को बेहतर तरीके से समझा। वह इस पूरी यात्रा को चुनौती नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानती हैं।


