रीजेंसी हॉस्पिटल ने बेहद जटिल और जानलेवा कार्डियक व वैस्कुलर मामलों का सफल इलाज कर मेडिकल क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग की टीम ने समय पर सटीक निदान, सही निर्णय और उच्च स्तरीय सर्जिकल विशेषज्ञता के बल पर कई नाजुक मरीजों की जान बचाई। इन जटिल मामलों में प्रक्रियाओं का नेतृत्व सीनियर कंसल्टेंट डॉ. शशांक त्रिपाठी ने अपनी अनुभवी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के साथ किया। नेपाला से आई 22 वर्षीय मरीज
ऐसा ही एक दुर्लभ मामला नेपाल की 22 वर्षीय युवती का था, जो लंबे समय से सिरदर्द, सिर में भारीपन और अत्यधिक कमजोरी से पीड़ित थी। जांच में ब्लड सर्कुलेशन का असामान्य पैटर्न सामने आया। इमेजिंग टेस्ट से यह स्पष्ट हुआ कि मरीज को एओर्टा से जुड़ी एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात बीमारी थी, जिसमें दाहिनी एओर्टिक आर्क और प्रमुख रक्त वाहिकाओं की असामान्य उत्पत्ति पाई गई। ऐसे में सर्जिकल टीम ने बाइपास सर्जरी कर पेट के हिस्से में ग्राफ्ट के माध्यम से रक्त प्रवाह का नया रास्ता बनाया। सर्जरी के बाद मरीज की हालत स्थिर हुई और चार दिन में उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया। दूसरी जटिल ऑपरेशन 77 वर्षीय बुजुर्ग का हुआ
इसी तरह हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित 77 वर्षीय मरीज को पेट में तेज दर्द के बाद इमरजेंसी में लाया गया। जांच में पेट की मुख्य धमनी में बड़ा एनीयूरिज्म पाया गया, जिसमें फटने का गंभीर खतरा था। मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए टीम ने मिनिमली इनवेसिव एंडोवैस्कुलर एनीयूरिज्म रिपेयर (EVAR) तकनीक अपनाई। सावधानीपूर्वक कवरड स्टेंट लगाकर एनीयूरिज्म को सील किया गया, जिससे मरीज की जान बच सकी।
इसके अलावा एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को बेहोशी की हालत में कम ब्लड प्रेशर और बिना पल्स के अस्पताल लाया गया। जांच में पता चला कि दिल के चारों ओर खून जम गया है और हार्ट अटैक के बाद वेंट्रिकल में रप्चर हो गया था, जो अत्यंत जानलेवा स्थिति मानी जाती है। कार्डियक सर्जिकल टीम ने तत्काल ओपन हार्ट सर्जरी कर जमा हुआ खून निकाला और हार्ट रप्चर को ठीक किया। मरीज को कुछ समय के लिए मैकेनिकल हार्ट सपोर्ट पर रखा गया और बाद में सफलतापूर्वक कोरोनरी बाइपास सर्जरी भी की गई। 300 ऑपरेशन किए गए
हॉस्पिटल में डेढ़ साल में करीब 300 ऑपरेशन किए जाने का डॉक्टरोंल ने दावा किया है।


