दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में स्टूडेंट्स को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। संस्थान में सोशल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट फॉर एम्पावर्ड सोसाइटी (स्वदेश) के सहयोग से लगभग 80 लाख रुपए की लागत से अत्याधुनिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) लेबोरेटरी स्थापित की जाएगी। यह लैब स्टूडेंट्स को स्मार्ट डिवाइस, सेंसर नेटवर्क, एम्बेडेड सिस्टम और इंटरकनेक्टेड टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देगी। साथ ही छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रोजेक्ट बेस्ड काम कर सकेंगे, जिससे उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा। इस लैब से स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल नॉलेज मिलेगा- कुलपति
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। उन्होंने कहा-इंटरनेट ऑफ थिंग्स प्रयोगशाला की स्थापना विश्वविद्यालय में नवाचार, अनुसंधान और उद्यमिता की संस्कृति को सुदृढ़ करेगी। इससे हमारे विद्यार्थी उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित कर आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे। IoT, AI और स्मार्ट सिस्टम तकनीकी विकास के प्रमुख क्षेत्र- प्रो. हिमांशु
फैकल्टी के डीन प्रो. हिमांशु पांडेय ने बताया कि वर्तमान समय में IoT, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट सिस्टम तकनीकी विकास के प्रमुख क्षेत्र हैं। यह प्रयोगशाला विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षण, शोध गतिविधियों और रोजगार परक ट्रेनिंग के अवसर प्रदान करेगी। आईईटी के निदेशक प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी ने कहा कि यह प्रयोगशाला छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। इसके माध्यम से वे स्मार्ट डिवाइस विकास, इंटरनेट आधारित अनुप्रयोगों, उभरती तकनीकों पर आधारित प्रयोग और परियोजनाेएं तैयार कर सकेंगे। स्टूडेंट्स को चुनौतियों के लिए तैयार करना उद्देश्य
स्वदेश संस्था के अध्यक्ष डॉ. राजीव निगम ने बताया कि संस्था का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से सशक्त बनाना है, ताकि विद्यार्थी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें। इस प्रयोगशाला के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, नवाचार आधारित परियोजनाओं और तकनीकी प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। संस्थान प्रशासन के अनुसार, इस प्रयोगशाला की स्थापना से विद्यार्थी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीकी प्रतियोगिताओं और शोध गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले सकेंगे। यह पहल विश्वविद्यालय में तकनीकी नवाचार और अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगी।


