यूजीसी इक्विटी नियम पर छात्रों का प्रदर्शन:भागलपुर में सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ विरोध, समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग

यूजीसी इक्विटी नियम पर छात्रों का प्रदर्शन:भागलपुर में सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ विरोध, समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग

भागलपुर में शुक्रवार को बहुजन छात्र संगठनों ने यूजीसी इक्विटी नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। उन्होंने सरकार और न्यायालय के फैसले पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शन की शुरुआत विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय प्रशाल भवन परिसर से हुई। छात्र संगठनों ने यहां से एकजुट होकर प्रतिरोध मार्च निकाला, जो अंबेडकर विचार विभाग और समाज कार्य विभाग होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों ने यूजीसी इक्विटी नियमावली को तत्काल लागू करने और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की। इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। संगठन के राज्य उपाध्यक्ष सह संयोजक प्रवीण कुमार कुशवाहा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को जातीय भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त बनाने के लिए यूजीसी इक्विटी नियमावली आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियमावली पर रोक लगने से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया बाधित होगी। छात्र नेताओं ने नई शिक्षा नीति 2020 को बहुजन विरोधी बताते हुए उसे वापस लेने की भी मांग की। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को समतामूलक और समावेशी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना की। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सामाजिक न्याय और समान शिक्षा अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी। भागलपुर में शुक्रवार को बहुजन छात्र संगठनों ने यूजीसी इक्विटी नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। उन्होंने सरकार और न्यायालय के फैसले पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शन की शुरुआत विश्वविद्यालय के बहुउद्देशीय प्रशाल भवन परिसर से हुई। छात्र संगठनों ने यहां से एकजुट होकर प्रतिरोध मार्च निकाला, जो अंबेडकर विचार विभाग और समाज कार्य विभाग होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंचा। इस दौरान छात्रों ने यूजीसी इक्विटी नियमावली को तत्काल लागू करने और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की। इस प्रदर्शन में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। संगठन के राज्य उपाध्यक्ष सह संयोजक प्रवीण कुमार कुशवाहा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को जातीय भेदभाव और उत्पीड़न से मुक्त बनाने के लिए यूजीसी इक्विटी नियमावली आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस नियमावली पर रोक लगने से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया बाधित होगी। छात्र नेताओं ने नई शिक्षा नीति 2020 को बहुजन विरोधी बताते हुए उसे वापस लेने की भी मांग की। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को समतामूलक और समावेशी बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की आलोचना की। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि परिसर में सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। छात्र संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सामाजिक न्याय और समान शिक्षा अधिकार की लड़ाई जारी रहेगी।  

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