Student Suicide: 9वीं के छात्र की संदिग्ध मौत, आम के पेड़ से लटका मिला शव, इलाके में मातम…

Student Suicide: 9वीं के छात्र की संदिग्ध मौत, आम के पेड़ से लटका मिला शव, इलाके में मातम…

Student Suicide: बिलासपुर शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत धूरी पारा मंगला इलाके से एक बेहद दुखद और चिंताजनक घटना सामने आई है। यहां 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक किशोर ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

मृतक की पहचान अरविंद पटेल के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, उसका शव घर की छत पर लगे आम के पेड़ से लटका हुआ मिला। परिजनों ने जब उसे इस हालत में देखा तो तुरंत आसपास के लोगों को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई।

Student Suicide: पढ़ाई से दूरी और व्यवहार में बदलाव की बात

परिवार के लोगों ने बताया कि अरविंद पिछले कुछ समय से पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहा था। वह करीब दो महीनों से स्कूल भी नहीं जा रहा था। परिजनों का कहना है कि उसका व्यवहार धीरे-धीरे बदल रहा था और वह गलत संगत में पड़ गया था। बताया जा रहा है कि वह नशे की लत वाले कुछ युवकों के संपर्क में था और अधिकतर समय उन्हीं के साथ बिताने लगा था।

मौके पर पहुंची पुलिस, जांच जारी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और शव को पेड़ से नीचे उतारा। पंचनामा कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी प्रकार का दबाव या अन्य कारण तो इस घटना के पीछे नहीं है।

इलाके में शोक, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

इस घटना के बाद पूरे इलाके में गहरा शोक व्याप्त है। पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं। एक होनहार छात्र की इस तरह असमय मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है।

Student Suicide: बढ़ती किशोर मानसिक स्वास्थ्य की चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में मानसिक तनाव, पढ़ाई का दबाव, गलत संगत और नशे जैसी आदतें कई बार गंभीर परिणामों की ओर ले जाती हैं। समय पर काउंसलिंग और पारिवारिक संवाद बेहद जरूरी है। बच्चों के व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्कूल और समाज स्तर पर जागरूकता की आवश्यकता है।

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