कैमूर जिले में राजस्व कर्मचारियों और सरकार-प्रशासन के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बढ़ता जा रहा है। जिले के राजस्व कर्मचारी अपनी 17 सूत्री मांगों के समर्थन में पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जिससे जनता के राजस्व संबंधी सभी कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह धरना भभुआ के लिच्छवी भवन के पास 11 फरवरी से जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों पर 9 महीने पहले लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उस पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। हड़ताल से जुड़ी 2 तस्वीरें.. लिच्छवी भवन के पास धरना जारी रहेगा
कर्मचारी सोनू कुमार ने इस संबंध में कहा कि यदि उपमुख्यमंत्री महोदय उनकी एक भी मांग को गलत ठहरा दें, तो वे हड़ताल तुरंत वापस ले लेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर उनकी मांगें जायज हैं, तो उन्हें अविलंब माना जाना चाहिए। धरना प्रदर्शन में शामिल राजस्व कर्मचारी रूबी कुमारी ने बताया कि सरकार की वादाखिलाफी के कारण उन्हें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और लिच्छवी भवन के पास धरना जारी रहेगा। कैमूर जिले में राजस्व कर्मचारियों और सरकार-प्रशासन के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बढ़ता जा रहा है। जिले के राजस्व कर्मचारी अपनी 17 सूत्री मांगों के समर्थन में पिछले एक महीने से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं, जिससे जनता के राजस्व संबंधी सभी कार्य पूरी तरह बाधित हो गए हैं और आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यह धरना भभुआ के लिच्छवी भवन के पास 11 फरवरी से जारी है। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने उनकी मांगों पर 9 महीने पहले लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उस पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है। हड़ताल से जुड़ी 2 तस्वीरें.. लिच्छवी भवन के पास धरना जारी रहेगा
कर्मचारी सोनू कुमार ने इस संबंध में कहा कि यदि उपमुख्यमंत्री महोदय उनकी एक भी मांग को गलत ठहरा दें, तो वे हड़ताल तुरंत वापस ले लेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर उनकी मांगें जायज हैं, तो उन्हें अविलंब माना जाना चाहिए। धरना प्रदर्शन में शामिल राजस्व कर्मचारी रूबी कुमारी ने बताया कि सरकार की वादाखिलाफी के कारण उन्हें मजबूरन सड़क पर उतरना पड़ा है। कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार की ओर से ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका यह आंदोलन और लिच्छवी भवन के पास धरना जारी रहेगा।


