सरकार की ओर से लिखित आदेश न आने तक आंदोलन:सुपौल में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल, बोले- बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं

सरकार की ओर से लिखित आदेश न आने तक आंदोलन:सुपौल में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल, बोले- बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं

सुपौल जिला मुख्यालय स्थित डिग्री कॉलेज चौक पर राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी लंबित मांगों पर सरकार की ओर से लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पहले कुछ मांगों पर बनीं थी सहमति संघ के अनुसार, राज्यभर के हजारों राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं। इस दौरान सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई, जिनमें कुछ मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आई थी। उच्च स्तरीय बैठकों में भी इन सहमतियों को मंजूरी मिलने का दावा किया गया, लेकिन अब तक किसी भी बिंदु पर ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। संघ के नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल मौखिक आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की जा रही है, जबकि पूर्व के समझौतों को भी सही ढंग से लागू नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों का सरकार पर से भरोसा उठता जा रहा है। कंप्यूटर, इंटरनेट और , प्रिंटर की सुविधा नहीं कर्मचारियों का कहना है कि वे 68 प्रकार के कार्यों का निष्पादन करते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। ऑनलाइन कार्यों के लिए पर्याप्त कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर और बिजली की सुविधा नहीं है। वहीं फील्ड में काम करने के लिए भी संसाधनों की कमी बनी हुई है। कई कर्मचारियों को अतिरिक्त हल्कों का प्रभार दिया गया है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, जिलास्तर पर धरना कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इससे राजस्व से जुड़े सभी कार्यों के पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही सुपौल जिला मुख्यालय स्थित डिग्री कॉलेज चौक पर राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी लंबित मांगों पर सरकार की ओर से लिखित आदेश जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। संघ ने यह भी चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पहले कुछ मांगों पर बनीं थी सहमति संघ के अनुसार, राज्यभर के हजारों राजस्व कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर हैं। इस दौरान सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई, जिनमें कुछ मांगों पर सहमति बनने की बात सामने आई थी। उच्च स्तरीय बैठकों में भी इन सहमतियों को मंजूरी मिलने का दावा किया गया, लेकिन अब तक किसी भी बिंदु पर ठोस और लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। संघ के नेताओं ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल मौखिक आश्वासन देकर आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की जा रही है, जबकि पूर्व के समझौतों को भी सही ढंग से लागू नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों का सरकार पर से भरोसा उठता जा रहा है। कंप्यूटर, इंटरनेट और , प्रिंटर की सुविधा नहीं कर्मचारियों का कहना है कि वे 68 प्रकार के कार्यों का निष्पादन करते हैं, लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। ऑनलाइन कार्यों के लिए पर्याप्त कंप्यूटर, इंटरनेट, प्रिंटर और बिजली की सुविधा नहीं है। वहीं फील्ड में काम करने के लिए भी संसाधनों की कमी बनी हुई है। कई कर्मचारियों को अतिरिक्त हल्कों का प्रभार दिया गया है, जिससे कामकाज प्रभावित हो रहा है और आम लोगों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, जिलास्तर पर धरना कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इससे राजस्व से जुड़े सभी कार्यों के पूरी तरह ठप होने की आशंका जताई जा रही  

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