Strategy For Share Market: बाजार का गिरना निवेशकों के लिए केवल पोर्टफोलियो में ‘लाल निशान’ नहीं है, बल्कि यह टैक्स प्लानिंग का एक ‘स्वर्ण अवसर’ भी है। यदि आप इस गिरावट को सही रणनीति से इस्तेमाल करें, तो आप सरकार को दिए जाने वाले टैक्स में लाखों की बचत कर सकते हैं। आइए समझते हैं ‘टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग’ (Tax Loss Harvesting) का वो गणित, जो बड़े पोर्टफोलियो मैनेजर इस्तेमाल करते हैं।
1. टैक्स लॉस हार्वेस्टिंग: घाटे से मुनाफे का सफर
सरल शब्दों में, अपने उन शेयरों को बेचना जो फिलहाल घाटे में चल रहे हैं, ताकि उस घाटे (Loss) को साल भर में हुए मुनाफे (Gains) के साथ ‘एडजस्ट’ किया जा सके। इससे आपकी ‘शुद्ध कर योग्य आय’ (Net Taxable Income) कम हो जाती है।
2. नए टैक्स नियमों का ‘चेक-लिस्ट’
2025-26 के बजट के नए प्रावधानों के अनुसार अपनी गणना इन नियमों पर आधारित रखें:
STCG (शॉर्ट टर्म): 12 महीने से कम के निवेश पर 20% टैक्स। (यहाँ घाटा बुक करना सबसे फायदेमंद है)।
LTCG (लोंग टर्म): 12 महीने से ऊपर के निवेश पर 12.5% टैक्स।
छूट की सीमा: साल भर में ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग-टर्म प्रॉफिट पूरी तरह टैक्स-फ्री है।
3. एडजस्टमेंट का ‘गोल्डन रूल’ (Set-off Rules)
शॉर्ट-टर्म लॉस (STCL): यह ‘ऑल-राउंडर’ है। इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के मुनाफे से काट सकते हैं।
लॉन्ग-टर्म लॉस (LTCL): यह केवल लॉन्ग-टर्म मुनाफे (LTCG) से ही एडजस्ट हो सकता है।
कैरी फॉरवर्ड: अगर इस साल मुनाफा कम और घाटा ज्यादा है, तो डरे नहीं। आप इस घाटे को अगले 8 सालों तक अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में आगे ले जा सकते हैं।
4. प्रो-टिप: ‘सेल एंड री-बाय’
बाजार की गिरावट में अच्छे शेयर भी नीचे हैं। आप घाटे वाले शेयर बेचकर अपना टैक्स बचाएं और उसी फंड से अच्छी क्वालिटी के शेयर (या वही शेयर) वापस खरीद लें। इससे आपका पोर्टफोलियो भी बना रहेगा और टैक्स की देनदारी भी खत्म हो जाएगी।
पैनिक नहीं, प्लानिंग करें
शेयर बाजार में गिरावट एक अस्थायी स्थिति है, लेकिन टैक्स में की गई बचत ‘स्थायी मुनाफा’ है। एक समझदार निवेशक वह नहीं है जो केवल हरा निशान देखकर खुश हो, बल्कि वह है जो लाल निशान का इस्तेमाल अपनी नेट वेल्थ (Net Wealth) बढ़ाने के लिए करे।
नोट: 31 मार्च की समय सीमा से पहले अपने पोर्टफोलियो का ‘टैक्स ऑडिट’ ज़रूर करें।


