दरभंगा में मंगलवार की रात करीब 11 बजे के बाद अचानक मौसम बदल गया। तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। कई इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश हुई। कुछ जगहों पर ओले भी गिरे। लहेरियासराय के लोहिया चौक सहित आसपास के इलाकों में करीब 20–25 ग्राम तक के ओले गिरने की सूचना है। बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर पड़ा है। वर्तमान में गेहूं की फसल कटाई के अंतिम चरण में है या खलिहानों में सुखाने के लिए रखी गई है। ऐसे में बारिश से फसल भीग गई, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने और नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा के बाद घाटे की स्थिति बनती दिख रही है। आम-लीची को भी नुकसान इसके अलावा आम और लीची की फसलों को भी भारी क्षति पहुंची है। किसानों का कहना है कि मंजर, फल झड़ गए हैं और पेड़ों को भी नुकसान हुआ है। सैदनगर निवासी राकेश कुमार ने बताया कि इस तरह की तेज ओलावृष्टि से गेहूं, मक्का और सब्जियों की फसल पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
मुआवजे की मांग मझौलिया की संगीता देवी ने बताया कि करीब आधे घंटे तक आंधी-तूफान चली और दो-तीन मिनट तक ओले गिरे, जो आलू के आकार के थे। गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। कल कटाई होनी थी, लेकिन अब सब चौपट हो गया। आम और लीची की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। इधर, लहेरियासराय के राकेश रंजन ने कहा कि ओले भले छोटे रहे हों, लेकिन बारिश और तेज हवा ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। दरभंगा में मंगलवार की रात करीब 11 बजे के बाद अचानक मौसम बदल गया। तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। कई इलाकों में तेज हवा के साथ बारिश हुई। कुछ जगहों पर ओले भी गिरे। लहेरियासराय के लोहिया चौक सहित आसपास के इलाकों में करीब 20–25 ग्राम तक के ओले गिरने की सूचना है। बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर पड़ा है। वर्तमान में गेहूं की फसल कटाई के अंतिम चरण में है या खलिहानों में सुखाने के लिए रखी गई है। ऐसे में बारिश से फसल भीग गई, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने और नुकसान की आशंका बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा के बाद घाटे की स्थिति बनती दिख रही है। आम-लीची को भी नुकसान इसके अलावा आम और लीची की फसलों को भी भारी क्षति पहुंची है। किसानों का कहना है कि मंजर, फल झड़ गए हैं और पेड़ों को भी नुकसान हुआ है। सैदनगर निवासी राकेश कुमार ने बताया कि इस तरह की तेज ओलावृष्टि से गेहूं, मक्का और सब्जियों की फसल पर बुरा असर पड़ेगा, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा, तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ सकता है।
मुआवजे की मांग मझौलिया की संगीता देवी ने बताया कि करीब आधे घंटे तक आंधी-तूफान चली और दो-तीन मिनट तक ओले गिरे, जो आलू के आकार के थे। गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। कल कटाई होनी थी, लेकिन अब सब चौपट हो गया। आम और लीची की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है। इधर, लहेरियासराय के राकेश रंजन ने कहा कि ओले भले छोटे रहे हों, लेकिन बारिश और तेज हवा ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द नुकसान का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।


