इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म तथा उसका निकाह कराने के मामले में अभियुक्त मौलवी मोहम्मद अयाज कासम के खिलाफ आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है। और राज्य सरकार व शिकायतकर्ता से याचिका पर जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने दिया है। याची ने बीएनएसएस की धारा की 528 के तहत मऊ के कोपागंज थाने में दर्ज केस रद करने की अर्जी दी है। कोर्ट में कहा-झूठा फंसाया गया प्रकरण में 27 दिसंबर 2025 को आरोप पत्र दाखिल किया गया है। अभियुक्त के वकील के अनुसार उसके मुवक्विल को झूठा फंसाया गया है और एफआइआर में लगाए गए षड्यंत्र में शामिल होने के आरोप झूठे हैं। कथित घटना 14 फरवरी 2024 को हुई थी, लेकिन एफआइआर नौ महीने बाद 16 नवंबर 2025 को दर्ज की गई और इस देरी का कोई उचित कारण नहीं दिया गया है।
निकाह का मौलवी था आरोपी
पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि उसका निकाह एक सितंबर 2025 को शाह आलम के साथ हुआ था और अभियुक्त उस निकाह का मौलवी था, लेकिन मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में उसने ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया। बचाव पक्ष के अनुसार विवेचना अधिकारी ने कोई सबूत नहीं पाया है कि अभियुक्त ने ऐसा कोई षड्यंत्र का अपराध किया है।
इस प्रकरण में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने 13जनवरी 2026 को संज्ञान लेकर समन आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा याची का मामला अन्य अभियुक्तों से अलग है।राहत केवल याची को दी गई है।जिसका लाभ अन्य अभियुक्तों को नहीं मिलेगा।


