Stock Market: शेयर बाजार गिर रहा है, सोना भी डगमगाया, बॉन्ड यील्ड ऊपर जा रही है। हर तरफ अफरा-तफरी है। ऐसे में Zerodha के सह-संस्थापक नितिन कामत ने एक बार फिर वही बात कही जो वो सालों से कहते आ रहे हैं। लेकिन इस बार शायद उनकी बात पहले से ज़्यादा जरूरी लग रही है। X पर एक पोस्ट में कामत ने Zerodha के Console प्लेटफॉर्म का एक पोर्टफोलियो चार्ट दिखाया। यह ऊपर से देखने में सिंपल लगता है। लेकिन कामत ने बताया कि इसे सही तरीके से बनाना कितना मुश्किल है। कैश आना-जाना, डिविडेंड, बोनस, स्टॉक स्प्लिट, आधी बिक्री, ट्रांसफर, इन सभी चीज़ों को सही तरीके से जोड़े बिना रिटर्न का हिसाब गड़बड़ हो जाता है। लेकिन असली बात चार्ट की नहीं थी।
कामत ने बताया कि उनके एक सहयोगी का पोर्टफोलियो लगातार बाज़ार के बेंचमार्क से आगे रहा है। कोई एक शेयर पर बड़ा दांव नहीं, कोई सेक्टर पर अंधाधुंध पैसा नहीं। बस एक संतुलित और डायवर्सिफाइड निवेश।
डायवर्सिफिकेशन आज के माहौल में बेहद जरूरी
30 मार्च को भी उन्होंने यही बात कही थी और उस बार बिल्कुल सीधे शब्दों में। उन्होंने लिखा था कि कोई नहीं जानता कि कौन सा एसेट क्लास कब अच्छा करेगा। 99 फीसदी लोगों के लिए सबसे बढ़िया काम यही है कि पैसा अलग-अलग जगह लगाओ और अच्छे-बुरे दोनों वक्त में टिके रहो। यह बात आज के माहौल में और भी जरूरी लगती है।
10% गिर चुका है निफ्टी
अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से निफ्टी 10 फीसदी से ज़्यादा गिर चुका है। सोना, जिसे हमेशा संकट में ढाल माना जाता है, वो भी डगमगाया है। बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है, क्योंकि बाज़ार को डर है कि महंगाई की वजह से केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रखेंगे। यानी शेयर, सोना, बॉन्ड, सब एक साथ मुश्किल में हैं। ऐसे वक्त में निवेशक क्या करें? किसी एक जगह सारा पैसा लगाएं या फिर डायवर्सिफाई कर दें?
कामत का जवाब साफ है। डायवर्सिफिकेशन का मतलब यह नहीं कि नुकसान होगा ही नहीं। मतलब यह है कि एक गलत अनुमान से सब कुछ तबाह नहीं होगा। जब एक सेक्टर या एक एसेट क्लास डूब रहा हो तो दूसरा संभाल सकता है। बाज़ार में टाइमिंग ढूंढना बड़े-बड़ों को नहीं आता। लेकिन अलग-अलग जगह पैसा लगाकर टिके रहना, यह आम निवेशक भी कर सकता है।


