सीवान में आंगनबाड़ी केंद्रों पर वसूली का स्टिंग ऑपरेशन:बच्चों के पोषण पर डाका, 4 हजार महीना नहीं दिए तो कटेगी राशि; निरीक्षी अधिकारी पर वसूली का आरोप

सीवान में आंगनबाड़ी केंद्रों पर वसूली का स्टिंग ऑपरेशन:बच्चों के पोषण पर डाका, 4 हजार महीना नहीं दिए तो कटेगी राशि; निरीक्षी अधिकारी पर वसूली का आरोप

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत समाज कल्याण विभाग द्वारा आईसीडीएस के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाते हैं। इसमें 0 से 6 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन सीवान में यह योजना बच्चों और महिलाओं के पोषण से ज्यादा अधिकारियों की जेब गर्म करने का जरिया बनती दिख रही है। जिले के बड़हरिया प्रखंड कार्यालय में दैनिक भास्कर द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन ने आंगनबाड़ी व्यवस्था में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। इसमें निरीक्षी अधिकारी खुले तौर पर यह स्वीकार करते नजर आए कि हर आंगनबाड़ी केंद्र से हर महीने 4 हजार रुपए की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, यदि कोई सेविका यह राशि नहीं देती है तो उसके पोषाहार की राशि में कटौती कर दी जाती है। स्टिंग में सामने आई बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि पोषण योजना के नाम पर आने वाली राशि में से हिस्सा वसूली का दबाव बनाया जाता है। सेविकाओं का कहना है कि यदि वे पैसा नहीं देंगी तो उनके केंद्र के पोषाहार की राशि कम कर दी जाएगी या उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाएगी। स्टिंग में खुली वसूली की परत स्टिंग वीडियो में एक आंगनबाड़ी सेविका अपने केंद्र की पोषाहार राशि कम मिलने को लेकर सवाल करती है। जवाब में निरीक्षी अधिकारी उसे टालने की कोशिश करते हैं। जब सेविका बताती है कि पोषाहार के लिए दाल, सोयाबीन, फल और अंडा खरीदने के बाद भी 4 हजार रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है, तो अधिकारी कथित रूप से कहते हैं कि 3 हजार 5 सौ दीजिए, इससे कम नहीं हो सकता, कम देना है तो मैडम से बात कीजिए। स्टिंग वीडियो में दर्ज बातचीत इस प्रकार है- सेविका: मैडम बताई ना। अधिकारी: क्या बताए। सेविका: हमारा पोषाहार की राशि कम क्यों गया है। अधिकारी: चावल गया है न, ज्यादा सभी को नहीं देना है न। सेविका: जितना लोग का उठाए हैं उतना लोग को दिए हैं, वो उतना ही दिए हैं, क्यों झूठ बोलने जाएं। अधिकारी: तो उनको कहां दिक्कत हो रहा है। सेविका: जिसका उठा रहे हैं उसको बुलाकर दे रहे हैं। अधिकारी: करिए जितना कहा जा रहा है, मैडम तो नहीं बोल रही है कम के लिए। सेविका: बताइए 23 सौ का दाल खरीदे, 5 सौ का सोयाबीन खरीदे, बच्चों को फल और अंडा खिलाना ही है, हिसाब भी चाहिए और पैसा में से भी 4 हजार से 1 रुपया कम नहीं होना चाहिए। इस बातचीत में सेविका साफ तौर पर यह कहती सुनाई दे रही है कि अगर पोषाहार की राशि से 4 हजार रुपए हर महीने दे दिए जाएंगे तो बच्चों को खिलाने के लिए पैसे ही नहीं बचेंगे। सेविका: हम कह रहे हैं 1 हजार रुपया लीजिए और बच्चा सबको खिलाने दीजिए। 8 किलो सेव खरीदकर बच्चों के लिए ले गए जो 12-13 दिन खिलाए हैं। बच्चे खा रहे हैं तो आंगनबाड़ी केंद्र पर आ रहे हैं। बच्चा भी केंद्र पर चाहिए और पैसा भी, तो दोनों में से एक में तो छूट देना पड़ेगा न। इस पर निरीक्षी अधिकारी का जवाब भी कम चौंकाने वाला नहीं है। अधिकारी: 3 हजार 500 रुपए दीजिए, इससे कम हम नहीं कर सकते हैं। अगर इससे कम देना है तो मैडम से बात कीजिए। इससे ज्यादा मेरे से बात नहीं कीजिए। सेविका बार-बार अधिकारियों से कम पैसा लेने की गुहार लगाती नजर आती है, ताकि बच्चों को बेहतर पोषण दे सके। सेविका: कहिए मैडम से कि 1 हजार रुपया लीजिए और बच्चा सबको सबकुछ खिलाती हूं। आपको दे देते हैं और बच्चों को नहीं खिलाते हैं तो बच्चे केंद्र पर नहीं आते हैं। आप कम लीजिएगा तो मेरे पास ज्यादा बचेगा तो बच्चों को भरपूर खिलाऊंगी। बच्चे खा रहे हैं तो केंद्र पर आ रहे हैं। लेकिन अधिकारी अपनी बात पर अड़े रहते हैं। अधिकारी: अरे भाई, अब इतना मतलब करिएगा तो जाकर मैडम से मिलिए। सेविका: मैडम से तो भेंट ही नहीं हो रहा है जब भी आ रहे हैं। अधिकारी: आइए न, मैडम आती हैं तो आप लोग आती ही नहीं हैं। अधिकारी: जल्दी करिए, यानी पैसा दीजिए हम जाएंगे, उससे कम नहीं होगा। लास्ट में सेविका गुस्से में कहती हैं, 1 हजार लीजिए, जाकर दे दीजिएगा। लेना होगा लीजिएगा, नहीं तो बच्चा सब को खिला रहे हैं, आकर अपना देख लीजिएगा। बच्चा सब बताएगा कि क्या खिलाते हैं क्या नहीं। इस स्टिंग में जिस अधिकारी की आवाज सुनाई दे रही है वह निरीक्षी अधिकारी बताए जा रहे हैं, जबकि बातचीत में बार-बार मैडम शब्द का प्रयोग बड़हरिया की सीडीपीओ के लिए किया गया है। सीडीपीओ ने आरोपों से किया इनकार जब इस मामले को लेकर बड़हरिया की सीडीपीओ काजल किरण से संपर्क किया गया तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, आरोप तो कोई किसी पर भी लगा सकता है। मैं भी आप पर आरोप लगा सकती हूं कि आप पैसा मांगते हैं। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने नहीं उठाया फोन मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) तरणि कुमारी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने सरकारी फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। डीएम की चुप्पी पर सवाल इस पूरे मामले को लेकर जब जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय को फोन किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद स्टिंग वीडियो और पूरी जानकारी उन्हें व्हाट्सएप पर भेजी गई। डीएम ने मैसेज देख लिया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया। प्रशासन की यह चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है। तीन प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार बड़हरिया की सीडीपीओ को न सिर्फ इस प्रखंड का प्रभार मिला हुआ है, बल्कि उन्हें लकड़ीनबीगंज और रघुनाथपुर प्रखंड का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। आरोप है कि इतना बड़ा प्रभार प्रभाव और पैसे के दम पर हासिल किया गया है। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत समाज कल्याण विभाग द्वारा आईसीडीएस के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जाते हैं। इसमें 0 से 6 साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन सीवान में यह योजना बच्चों और महिलाओं के पोषण से ज्यादा अधिकारियों की जेब गर्म करने का जरिया बनती दिख रही है। जिले के बड़हरिया प्रखंड कार्यालय में दैनिक भास्कर द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन ने आंगनबाड़ी व्यवस्था में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं। इसमें निरीक्षी अधिकारी खुले तौर पर यह स्वीकार करते नजर आए कि हर आंगनबाड़ी केंद्र से हर महीने 4 हजार रुपए की मांग की जाती है। इतना ही नहीं, यदि कोई सेविका यह राशि नहीं देती है तो उसके पोषाहार की राशि में कटौती कर दी जाती है। स्टिंग में सामने आई बातचीत से यह स्पष्ट होता है कि पोषण योजना के नाम पर आने वाली राशि में से हिस्सा वसूली का दबाव बनाया जाता है। सेविकाओं का कहना है कि यदि वे पैसा नहीं देंगी तो उनके केंद्र के पोषाहार की राशि कम कर दी जाएगी या उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी जाएगी। स्टिंग में खुली वसूली की परत स्टिंग वीडियो में एक आंगनबाड़ी सेविका अपने केंद्र की पोषाहार राशि कम मिलने को लेकर सवाल करती है। जवाब में निरीक्षी अधिकारी उसे टालने की कोशिश करते हैं। जब सेविका बताती है कि पोषाहार के लिए दाल, सोयाबीन, फल और अंडा खरीदने के बाद भी 4 हजार रुपए देने का दबाव बनाया जा रहा है, तो अधिकारी कथित रूप से कहते हैं कि 3 हजार 5 सौ दीजिए, इससे कम नहीं हो सकता, कम देना है तो मैडम से बात कीजिए। स्टिंग वीडियो में दर्ज बातचीत इस प्रकार है- सेविका: मैडम बताई ना। अधिकारी: क्या बताए। सेविका: हमारा पोषाहार की राशि कम क्यों गया है। अधिकारी: चावल गया है न, ज्यादा सभी को नहीं देना है न। सेविका: जितना लोग का उठाए हैं उतना लोग को दिए हैं, वो उतना ही दिए हैं, क्यों झूठ बोलने जाएं। अधिकारी: तो उनको कहां दिक्कत हो रहा है। सेविका: जिसका उठा रहे हैं उसको बुलाकर दे रहे हैं। अधिकारी: करिए जितना कहा जा रहा है, मैडम तो नहीं बोल रही है कम के लिए। सेविका: बताइए 23 सौ का दाल खरीदे, 5 सौ का सोयाबीन खरीदे, बच्चों को फल और अंडा खिलाना ही है, हिसाब भी चाहिए और पैसा में से भी 4 हजार से 1 रुपया कम नहीं होना चाहिए। इस बातचीत में सेविका साफ तौर पर यह कहती सुनाई दे रही है कि अगर पोषाहार की राशि से 4 हजार रुपए हर महीने दे दिए जाएंगे तो बच्चों को खिलाने के लिए पैसे ही नहीं बचेंगे। सेविका: हम कह रहे हैं 1 हजार रुपया लीजिए और बच्चा सबको खिलाने दीजिए। 8 किलो सेव खरीदकर बच्चों के लिए ले गए जो 12-13 दिन खिलाए हैं। बच्चे खा रहे हैं तो आंगनबाड़ी केंद्र पर आ रहे हैं। बच्चा भी केंद्र पर चाहिए और पैसा भी, तो दोनों में से एक में तो छूट देना पड़ेगा न। इस पर निरीक्षी अधिकारी का जवाब भी कम चौंकाने वाला नहीं है। अधिकारी: 3 हजार 500 रुपए दीजिए, इससे कम हम नहीं कर सकते हैं। अगर इससे कम देना है तो मैडम से बात कीजिए। इससे ज्यादा मेरे से बात नहीं कीजिए। सेविका बार-बार अधिकारियों से कम पैसा लेने की गुहार लगाती नजर आती है, ताकि बच्चों को बेहतर पोषण दे सके। सेविका: कहिए मैडम से कि 1 हजार रुपया लीजिए और बच्चा सबको सबकुछ खिलाती हूं। आपको दे देते हैं और बच्चों को नहीं खिलाते हैं तो बच्चे केंद्र पर नहीं आते हैं। आप कम लीजिएगा तो मेरे पास ज्यादा बचेगा तो बच्चों को भरपूर खिलाऊंगी। बच्चे खा रहे हैं तो केंद्र पर आ रहे हैं। लेकिन अधिकारी अपनी बात पर अड़े रहते हैं। अधिकारी: अरे भाई, अब इतना मतलब करिएगा तो जाकर मैडम से मिलिए। सेविका: मैडम से तो भेंट ही नहीं हो रहा है जब भी आ रहे हैं। अधिकारी: आइए न, मैडम आती हैं तो आप लोग आती ही नहीं हैं। अधिकारी: जल्दी करिए, यानी पैसा दीजिए हम जाएंगे, उससे कम नहीं होगा। लास्ट में सेविका गुस्से में कहती हैं, 1 हजार लीजिए, जाकर दे दीजिएगा। लेना होगा लीजिएगा, नहीं तो बच्चा सब को खिला रहे हैं, आकर अपना देख लीजिएगा। बच्चा सब बताएगा कि क्या खिलाते हैं क्या नहीं। इस स्टिंग में जिस अधिकारी की आवाज सुनाई दे रही है वह निरीक्षी अधिकारी बताए जा रहे हैं, जबकि बातचीत में बार-बार मैडम शब्द का प्रयोग बड़हरिया की सीडीपीओ के लिए किया गया है। सीडीपीओ ने आरोपों से किया इनकार जब इस मामले को लेकर बड़हरिया की सीडीपीओ काजल किरण से संपर्क किया गया तो उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, आरोप तो कोई किसी पर भी लगा सकता है। मैं भी आप पर आरोप लगा सकती हूं कि आप पैसा मांगते हैं। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने नहीं उठाया फोन मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) तरणि कुमारी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने सरकारी फोन उठाना जरूरी नहीं समझा। डीएम की चुप्पी पर सवाल इस पूरे मामले को लेकर जब जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय को फोन किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद स्टिंग वीडियो और पूरी जानकारी उन्हें व्हाट्सएप पर भेजी गई। डीएम ने मैसेज देख लिया, लेकिन खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया। प्रशासन की यह चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है। तीन प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार बड़हरिया की सीडीपीओ को न सिर्फ इस प्रखंड का प्रभार मिला हुआ है, बल्कि उन्हें लकड़ीनबीगंज और रघुनाथपुर प्रखंड का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। आरोप है कि इतना बड़ा प्रभार प्रभाव और पैसे के दम पर हासिल किया गया है।  

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