स्टील कार्टेल का पर्दाफाश: CCI ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल को ठहराया दोषी, बड़े CEO भी शिकंजे में।

स्टील कार्टेल का पर्दाफाश: CCI ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल को ठहराया दोषी, बड़े CEO भी शिकंजे में।
हाल के दिनों में देश के स्टील सेक्टर को लेकर एक बड़ी हलचल सामने आई है, जिसने उद्योग और बाजार दोनों का ध्यान खींचा है। ताज़ा घटनाक्रम में भारत की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था ने कुछ अहम निष्कर्ष निकाले हैं, जिनका असर आने वाले समय में गहरा हो सकता है।
बता दें कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकारी कंपनी सेल समेत कुल 28 स्टील कंपनियों को एंटी-ट्रस्ट कानून के उल्लंघन का दोषी पाया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इन कंपनियों ने 2015 से 2023 के बीच स्टील की बिक्री कीमतों को लेकर आपसी मिलीभगत की थी। इस मामले से जुड़ा आदेश 6 अक्टूबर का है, जिसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
गौरतलब है कि इस जांच में सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बल्कि 56 शीर्ष अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें जेएसडब्ल्यू स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर सज्जन जिंदल, टाटा स्टील के सीईओ टी. वी. नरेंद्रन और सेल के चार पूर्व चेयरमैन भी शामिल हैं। आयोग के मुताबिक, अलग-अलग समयावधि में इन अधिकारियों की भूमिका कीमत तय करने की प्रक्रिया में पाई गई है।
यह जांच साल 2021 में शुरू हुई थी, जब तमिलनाडु की कोयंबटूर कॉरपोरेशन कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने अदालत में आरोप लगाया था कि कुछ स्टील कंपनियां आपूर्ति सीमित कर कृत्रिम रूप से दाम बढ़ा रही हैं। आरोप था कि छह महीनों में स्टील की कीमतों में करीब 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, जिससे निर्माण क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ।
मौजूद जानकारी के अनुसार, अदालत ने इस मामले को प्रतिस्पर्धा से जुड़ा मानते हुए सीसीआई को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और इसमें कुल 31 कंपनियां, कई उद्योग संगठन और दर्जनों अधिकारी शामिल किए गए। सीसीआई के नियमों के तहत, कार्टेल जैसे मामलों का विवरण अंतिम आदेश से पहले सार्वजनिक नहीं किया जाता।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान व्हाट्सऐप चैट्स की भी समीक्षा की गई, जिनमें क्षेत्रीय उद्योग समूहों के बीच कीमत तय करने और उत्पादन घटाने जैसी बातचीत के संकेत मिले। आयोग ने संभावित जुर्माने की गणना के लिए कंपनियों से आठ वित्तीय वर्षों तक के ऑडिटेड वित्तीय विवरण भी मांगे हैं।
गौरतलब है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा स्टील उत्पादक देश है और बुनियादी ढांचे पर बढ़ते सरकारी खर्च के चलते मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अगर आरोप अंतिम आदेश में भी साबित होते हैं, तो सीसीआई कंपनियों पर मुनाफे का तीन गुना या टर्नओवर का 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगा सकता है। व्यक्तिगत अधिकारियों पर भी आर्थिक दंड संभव है।
हालांकि, जेएसडब्ल्यू स्टील और सेल ने आयोग के समक्ष इन आरोपों से इनकार किया है और अपनी सफाई दर्ज कराई है। अंतिम फैसला आने में अभी कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि कंपनियों और अधिकारियों को अपनी आपत्तियां रखने का अवसर दिया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे मामले ने भारतीय स्टील उद्योग में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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