मंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच के लंबित डीए का 25 प्रतिशत 31 मार्च तक भुगतान करने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार कर्मचारियों का डीए केंद्रीय सरकार कर्मचारियों के बराबर लाने की प्रक्रिया शुरू करे और 2008 से लंबित बकाए को शीघ्र निपटाए। उनके मुताबिक राज्य सरकार ने बकाए का भुगतान करने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के बजाय, सुप्रीम कोर्ट से दिसंबर तक भुगतान के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है, जिसके कारण मंच को विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
सरकारी कर्मचारियों को भेंट किए गुलाब
कोलकाता. कई सरकारी कर्मचारियों संगठनों ने डीए बकाए की भुगतान को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को पूर्ण कार्य बहिष्कार का आह्वान किया गया। यह विरोध संघर्षशील संयुक्त मंच के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसने राज्य सरकार पर भारतीय सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बावजूद डीए बकाए के भुगतान में देरी करने का आरोप लगाया है। हालांकि राज्य व्यापी इस हड़ताल का ज्यादा असर नहीं दिखा। कुछ जगहों पर इसका विशेष प्रभाव के बीच ज्यादातर स्थानों पर आम दिनों की तरह सामान्य काम काज हुआ।
मंच के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच के लंबित डीए का 25 प्रतिशत 31 मार्च तक भुगतान करने का आदेश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि राज्य सरकार कर्मचारियों का डीए केंद्रीय सरकार कर्मचारियों के बराबर लाने की प्रक्रिया शुरू करे और 2008 से लंबित बकाए को शीघ्र निपटाए। उनके मुताबिक राज्य सरकार ने बकाए का भुगतान करने के लिए कोई ठोस कदम उठाने के बजाय, सुप्रीम कोर्ट से दिसंबर तक भुगतान के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है, जिसके कारण मंच को विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
सरकारी कर्मचारियों को भेंट किए गुलाब
मंच के समर्थकों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराते हुए सुबह के समय सरकारी कर्मचारियों को कार्यालय में प्रवेश करने से रोकने के बजाय उन्हें गुलाब के फूल भेंट कर हड़ताल के समर्थन और उसमें शामिल होने की अपील की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कदम कर्मचारियों से एकजुटता दिखाने और आंदोलन के प्रति समर्थन जताने के लिए शांतिपूर्ण संदेश देने के उद्देश्य से उठाया गया। इस दौरान जब सरकारी वाहन खाद्य भवन के मुख्य द्वार से अंदर जाने का प्रयास कर रहे थे, तब प्रदर्शनकारियों ने मानव श्रृंखला बनाकर उनका रास्ता रोक दिया। प्रतिभागियों ने इसे ‘गांधीगिरी’ बताते हुए कहा कि उनका विरोध पूरी तरह अहिंसक तरीके से सरकार की नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का प्रयास है।
कलकत्ता हाईकोर्ट में भी कामकाज बाधित रहा
उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता न मिल पाने के कारण कलकत्ता हाईकोर्ट में भी कामकाज बाधित रहा। हाईकोर्ट के कर्मचारी कोर्ट के प्रवेश द्वार के बाहर आ कर प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने कार्यालय में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। उनके समर्थन में हाईकोर्ट के 75 प्रतिशत अधिवक्ता ने भी सुनवाई में भाग नहीं लिया। वे भी कर्मचारियों के प्रदर्शन में शामिल हो गए। मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने कहा कि जब तक दोनों पक्षों के वकील उपस्थित नहीं होंगे याचिका पर सुनवाई नहीं की जाएगी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश एजलास छोड़कर चेंबर में चले गए। तृणमूल समर्थित अधिवक्ता सुनवाई में भाग लेना चाहते थे मगर न्यायाधीशों ने एकतरफ़ा सुनवाई में दिलचस्पी नहीं दिखाई। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस महंगाई भत्ता रोकने के लिए अदालतों में जा रही है। करोड़ों खर्च कर रही है। मगर अपने कर्मचारियों को उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार नहीं दे रही है। उल्लेखनीय है कि ममता बनर्जी सरकार ने हाल में ही 4 प्रतिशत महंगाई भत्ता अपने कर्मचारियों को देने का ऐलान किया है।
उपस्थिति अनिवार्य करने के लिए अधिसूचना
इससे पहले राज्य सरकार ने शुक्रवार को उपस्थिति अनिवार्य करने के लिए एक अधिसूचना जारी कर कहा कि इस दिन कोई आकस्मिक अवकाश या अन्य प्रकार का अवकाश नहीं दिया जाएगा। साथ ही, यह चेतावनी दी कि जो कर्मचारी वैध कारणों के बिना अनुपस्थित रहेंगे, उन्हें सेवा में ब्रेक, उस दिन का वेतन कटौती और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, और संबंधित प्रक्रियाएं 31 मार्च तक पूरी की जानी हैं।


